सुविधा के नाम शोषण सरकारों का शर्मनाक कृत्य आधी अधूरी असुविधा युक्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर कानून की आड़ में उगाही जारी

व्ही.एस.भुल्ले 
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
कभी निर्माता एजेन्सी के घाटे, तो कभी गजट नोटीफिकेशन की प्रति दिखाने वाले अघोषित रूप से प्रवक्ता एन.एच.ए.आई. के जिम्मेदार लोग निर्माण एजेन्सी द्वारा टर्मिनेशन का आवेदन दिए जाने की बात कहते हुए नहीं थकते हो और आम नागरिक के शोषण पर चुप रह, तमाशा देखते हो, तो कभी अपनी बैवसी का रोना-रोते हो। मगर जिस तरह से अधूरे सड़क निर्माण पर मनमाने अंदाज में बसूली हो रही है। भले ही उसे गजट नोटीफिकेशन का संरक्षण प्राप्त हो वह नैतिक दृष्टि से उचित नहीं। मगर स्तब्ध करने वाली बात यह है कि शिवपुरी से ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 3 पर हो रही बसूली पर राज्य व केन्द्र सरकारों की बैवसी फिलहाल अपने ही नागरिकों की मदद को तैयार नहीं। 
कारण एन.एच.ए.आई द्वारा बनाए गए नियम कानून के चलते मंत्री से लेकर राज्य सरकार के आला अफसर तक मजबूर है। जब हमारे संवाददाता द्वारा सच जानने भारत सरकार के परिवहन पोत जल मार्ग मंत्री नितिन गडकरी के कार्यालय पर फोन लगाया गया तो वहां बताया गया कि आप टोल संयुक्त संचिव से चर्चा करें। उनके फोन पर बताया गया कि आप अधीक्षण यंत्री टोल से बात करें। जिस पर एन.एच.ए.आई के अधीक्षण यंत्री टोल श्री जोशी ने बताया कि अगर अच्छी सड़कें चाहिए तो टोल तो देना पड़ेगा। जब संवाददाता द्वारा यह दोहराया गया कि आपके द्वारा स्थापित टोल व्यवहारिक व नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है और टोल पर सभ्र्रान्त लोगों के साथ उचित व्यवहार नहीं रखा जाता। जिस शिवपुरी-ग्वालियर मार्ग को पूर्ण कर सारी सुविधायें मुहैया करा, टोल शुरू होना था उसका घटिया आधा-अधूरा निर्माण कर और समूचे सुख-सुविधा मौजूद न होने के बावजूद टोल बसूली नागरिक अधिकारों का हनन है और उनका शोषण भी, जो नैतिक दृष्टि से उचित नहीं। इस पर अधिक्षण श्री जोशी का दो टूक गैर जिम्मेदारना तर्क था कि आपको सुन लिया गया है और टोल तो सभी को देना होगा। चाहे डाॅक्टर हो, या कोई हो। केवल मानवीय विधायक, संासद, मंत्री, एन.एच.ए.आई के अधिकारी या अन्य गजट नोटीफिकेशन में सूचीबद्ध लोगों से टोल नहीं लिया जायेगा।
बहरहाल जो भी हो, मगर जिस अहंकारी अंदाज में गडकरी के मंत्रालय के अधिकारी व एन.एच.ए.आई के जिम्मेदार अफसर आम जन को टोल ऐजेन्सी के पक्ष में हड़काते दिखते है। ऐसे में यक्ष सवाल यह है कि कोई भी चुनी हुई सरकार जनकल्याण से इतर जन सुविधाओं से इतर अपने नागरिकों का आर्थिक शोषण करने की छूट किसी भी एजेन्सी को कैसे दे सकती है। यहां समझने वाली बात यह है कि जब चार पहिया वाहनों से लाईफ टाइम रोड टेक्स एक मुश्त बसूल लिया जाता है परिवहन विभाग द्वारा तो फिर पुनः टोल के रूप में रोड टेक्स क्यों ? क्या एक ही सुविधा के दो-दो टेक्स बसूलना उचित है या यह संवैधानिक संस्थाओं, सरकार के नौकरशाहों, बुद्धिजीवी, सांसद, विधायक आम नागरिक को समझने वाली बात होना चाहिए। उदाहरण के लिए जिस तरह से शिवपुरी स्थित मुढ़खेड़ा टोल और पूरनखेड़ी टोल पर आये दिन घटनाऐं अधिकारी, कर्मचारी, सभ्रान्त नागरिकों के साथ हो रही है। यह सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में शर्मनाक है। बेहतर हो कि सरकारें, संवैधानिक संस्थाऐं और केन्द्र सरकार के मंत्री नितिन गडकरी एन.एच.ए.आई के कृत्यों को गंभीरता से ले, जिससे एक विकास उन्मुख जनकल्याणकारी मोदी सरकार की प्रतिष्ठा को कलंकित होने बचाया जा सके। 

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