क्या ई-टेन्डरिंग के तिलिस्म को तोड़ पायेगी, कमलनाथ सरकार राहुल की मंशा को पलीता लगाती, सरकार

वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
राहुल की जम्हूरी मैदान की दहाड़ के पीछे का सच जो भी हो। मगर जिस तरह से उन्होंने गांव, गली, गरीब, नौजवान, किसान के हित में आवाज बुलन्द कर मंच पर मौजूद म.प्र. सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री को हिदायत दी है। उससे साफ है कि वह अपने पिता स्व. राजीव गांधी द्वारा गांव, गली तक सत्ता की हनक पहुंचाने की गरज से संविधान में 73 व 74वे संविधान संशोधन कर देश में पंचायतीराज व नगरीयाराज की स्थापना की। शायद उसी से प्रेरणा लें, राहुल गांधी भी म.प्र. सरकार को गांव, गली अर्थात नगरीय पंचायतीराज के साथ म.प्र. सरकार को चलते देखना चाहते है। इसीलिए मंच से उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह म.प्र. को कृषि प्रधान प्रदेश ही नहीं स्थानीय उघोगों के हव के रूप में देखना चाहते है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले 10 वर्ष में वह चाहते है कि म.प्र. में मेडिन म.प्र. ही नहीं, हर जिले गांव का नाम उत्पादन से जुड़े। उन्होंने मंच से यह भी स्पष्ट किया कि म.प्र. में काॅग्रेस सरकार केवल काॅग्रेस की सरकार नहीं, बल्कि आम गरीब, किसान, युवा, नौजवान, माता-बहिनों एवं काॅग्रेस कार्यकर्ता की सरकार है और यह एहसास हर अन्तिम व्यक्ति तक हो, यह सरकार के मंत्री व मुख्यमंत्री को सुनिश्चित कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरे और म.प्र. सरकार के दरवाजे हमेशा आम व्यक्ति व काॅग्रेस कार्यकर्ता के लिए हमेशा खुले है। 
भले ही राहुल गांधी लोगों के हित में बहुत कुछ मंच से कह गए हो। मगर पूर्ववत भाजपा सरकार के शासन काल में केन्द्रीयकृत ई-टेन्डरिंग प्रणाली के चलते निर्माण, सप्लाई क्षेत्र में जो अघोषित तौर पर माफियाराज कायम हुआ उसने छोटे-मोटे ठेकेदार ही नहीं, सप्लायरों का भी रोजगार छीन लिया। यह यक्ष सवाल आज भी कमलनाथ सरकार के सामने प्रमाणिक तौर पर यथावत है। भ्रष्टाचार रोकने के नाम पर म.प्र. में आई, वर्तमान में प्रचलित ई-टेन्डरिंग प्रक्रिया का सच यह है कि जैसी कि आम चर्चा भी है और हजारों करोड़ों का ई-टेन्डरिंग घोटाला फिलहाल फाइलों में बन्द है। इसके विरूद्ध आज भी  अप्रशिक्षित, तकनीकी से अनभिज्ञ लोगों के बीच ई-टेन्डरिंग का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है। जो निर्माण, सप्लाई क्षेत्र में अघोषित रूप से स्थापित हो चुके माफियाराज को समझने काफी है। वर्तमान हालात यह है कि आज भी हजारों लोग या तो बेरोजगार है, या फिर शासन द्वारा निर्धारित निर्माण दर से 20-30-40 प्रतिशत कम दर पर कार्य करने पर मजबूर है, जो एक प्रमाण है।
बेहतर हो कमलनाथ सरकार निर्माण या अन्य क्षेत्रों से माफियाराज खत्म करने राहुल की मंशा अनुरूप विकेन्द्रीकरण के मार्ग पर चल ई-टेन्डरिंग के तिलिस्म को तोड़ निर्माण क्षेत्र में लाॅटरी सिस्टम से ठेका देने की शुरूआत कर, यह सुनिश्चित करें कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हो और लाखों लोगों को रोजगार का रास्ता साफ हो। मगर यह तभी संभव है जब सरकार विकेन्द्रीकरण के रास्ते चल ई-टेन्डरिंग जैसी व्यवस्था से निजात पा, अघोषित रूप से कायम माफियाराज को लगाम लगा सके।

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