सारथी की मुद्रा में सिंधिया जम्हूरी मैदान में जमकर दहाड़े ज्योतिरादित्य सिंधिया
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
राजशी ठाट-वाट त्याग, राष्ट्र जन सेवा में स्वयं को 18 घन्टे तक झौंकने वाले स्व. माधवराव सिंधिया के इकलौते पुत्र भाजपा की जननी स्व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया के सुपौत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह साबित कर दिया कि वह महाराजा होने के बावजूद भी राष्ट्र जनकल्याण के लिए एक सच्चे सारथी भी बन सकते है। जिस दहाड़ के साथ उन्होंने भाजपा को ललकारा है वह कोई साधारण बात नहीं, कारण स्पष्ट है राष्ट्र जन कल्याण और अपने नेता का निस्वार्थ के साथ 2ः30 पर सोने वाले 3ः45 बजे उठने वाले दैनिक व्यायाम के बाद 8ः50 पर तैयार हो सामाजिक व्यवहारिक सरोकारों को पूर्ण कर 9ः30 पर पुनः आम जन को स्वयं को समर्पित नेता की खास बात यह है कि लाख मुश्किलों के बावजूद कभी किसी से शिकायत नहीं की। राष्ट्र जन कल्याण में लीन ग्वालियर-चम्बल के इस शेर का आलम यह है कि जो न तो प्रकृति विरूद्ध किसी सिद्धान्त को स्वीकारना चाहता है, न ही हर हालत में अपने कत्र्तव्य निर्वहन को परास्त होने देखना चाहता। अपने माता-पिता के भक्त इस राजवंशी की कृतज्ञता का परिणाम फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। मगर सच यह है कि इस महान राष्ट्र का नागरिक अपने कत्र्तव्य निर्वहन की पराकष्ठा चाहता है। 
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