कर्ज में डूबी, कमलनाथ सरकार की माली हालत पर सवाल आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र, समय की दरकार भुगतान वेतन को भटकते लोग
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अगर यो कहे कि जब से कमलनाथ सरकार म.प्र. में अस्तित्व में आई है तब से लोगों के संभावित भुगतान तो दूर आम कर्मचारियों को भी वेतन के लाले है। अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस बेरहमी से सेवा, विकास, कल्याण के नाम म.प्र. को कर्जदार बना, उसे आर्थिक रूप से खोखला कर, म.प्र. में जनधन लुटा है। इस नजीर ने शायद अंग्रेजों को भी पीछे छोड़, म.प्र. की भूमि को भी शर्मसार किया है। मगर दुर्भाग्य कि सियासी गलियारों में आज भी इसकी चर्चा तक नहीं। फिलहाल तो प्रदेश सरकार के आर्थिक हालातों के मद्देनजर श्वेत पत्र ही एक ऐसा नुक्सा मौजूदा सरकार के पास बचा है। जिससे वह म.प्र. की माली हालत का खुलासा कर दूध का दूध और पानी का पानी कर म.प्र. के लोगों को यह बता सके कि पूर्ववर्ती सरकार ने किस तरह से जनधन का उपयोग किया है और आर्थिक रूप से इस प्रदेश को गर्त में डालने का काम किया है।
बेहतर हो कि जब सरकार श्वेत पत्र लेकर आये और जिससे जैसी कि चर्चा है कि सत्ता सौपानों को ठेके पर उठा जनधन का दुरूपयोग करने वालो का खुलासा हो सक और म.प्र. का आम नागरिक भी इस सत्य से सामना कर सके कि विगत वर्षो में कौन-सी सेवा, कल्याण और विकास किस कीमत पर हुआ है। यह सरकार को समझने और समझाने वाली बात होना चाहिए। जिससे भविष्य में कोई भी सत्ता और सरकार अपने निहित स्वार्थवत जनधन का दुरूपयोग न कर सके।
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