17वीं लोकसभा चुनाव प्रमाण, परिणाम, पारिदर्शिता आधार हो, आस्था और विश्वास का शिक्षा, स्वाभिमान, सम्मान का दर्द आज भी यक्ष 90 करोड़ नागरिक करेंगें 543 सदस्यों के भाग्य का फैसला 7 चरण, परिणाम 23 मई को 29 राज्य 7 केन्द्र शासित प्रदेश, 1.5 करोड़ 18-19 साल के युवा


व्ही.एस.भुल्ले 
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।   
गुलामी से उभरे लुटे-पिटे अर्धवस्त्र, ज्वार, बाजरा, मक्का पर निर्भर देश में इन 70 वर्षो में कुछ नहीं हुआ तो यह उन पुण्य आत्माओं, महापुरूषों के साथ अन्याय होगा। जिन्होंने अपनी समझ-बूझ मौजूद संसाधनों के बल इस देश को समर्थ, सक्षम बनाने में अपना अहम योगदान दिया। यहां तक कि राष्ट्र की खातिर अपना अमूल्य बलिदान भी दिया। मगर वर्तमान हालातों के मद्देनजर यक्ष सवाल यह है कि शिक्षा, स्वाभिमान, सम्मान बचाने में आखिर चूक कहां हुई जो हम अपनी समृद्धि, संस्कृति, संस्कारों को नहीं बचा सके, न ही हम अपनी प्रतिभाओं को संरक्षण दें, उन्हें संसाधन सहित प्रतिभा, प्रदर्शन के समान सहज अवसर उपलब्ध करा सके। इतना ही नहीं, अपनों के ही बीच हम दो भागों में बट जीवन के कठोरतम स्तर पर जीने पर आखिर क्यों मजबूर हुये। कारण साफ है कहीं तो चूक हुई है जो एक समृद्ध, सुसंस्कृत, संस्कारित, शिक्षित, खुशहाल स्वाभिमानी देश के बुजुर्ग, युवा, बच्चे ही नहीं, आने वाली पीढ़ी भी, विचलित बैहाल और दृगभ्रमित है, मजबूर, बैवस है।
अब सवाल यह है कि एक समृद्ध, खुशहाल, सक्षम राष्ट्र में ऐसा क्या हुआ इसकी समीक्षा ही इस महान राष्ट्र को समृद्ध, खुशहाल बना सकती है। क्योंकि 17वीं लोकसभा ही तय करेगी कि इस राष्ट्र की दिशा-दशा क्या हो, जिसका संज्ञान ही आज आम नागरिक का धर्म और कर्म होना चाहिए।
जय स्वराज

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