राष्ट्र साम्राज्यवाद के बीच सिसकता लोकतंत्र प्रमाण, प्रमाणिकता प्रमुख मुद्दों से इतर निहित स्वार्थ में डूबा सत्ता, संघर्ष


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
सियासी दलों का आधार जो भी हो, मगर सत्ता रूढ़ होने के लिए जिस तरह से स्वार्थवत, साम्राज्यवाद या वैचारिक आधार के बीच सारी संस्कारिक मर्यादायें लांग सत्ता के लिए संघर्ष छिड़ा है। यह सिसकते लोकतंत्र का जीता-जागता प्रमाण नहीं तो और क्या ? आज जिस तरह से कत्र्तव्य निष्ठ ईमानदार संगठन सियासी वैचारिक दल, संवैधानिक संस्थाओं के रहते मजबूत लोकतंत्र और राष्ट्र जनकल्याण की आशा-आकाक्षांयें संघर्षरत है। उसके चलते आम जन राष्ट्र के मुद्दों का सियासी संघर्ष से बाहर होना सच को समझने काफी है। 
17वीं लोकसभा के लिए शुरू हो चुके देश भर में चुनावी सत्ता, संघर्ष का सच जो भी हो। मगर जिस तरह से देश की सियासत राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद के दोे धु्रवों में बट चुकी है। यह आज इस महान राष्ट्र के हर बुजुर्ग, युवा, बच्चों को समझने वाली बात है। कहते है कि सेवा कल्याण के नाम सत्ता शोषण की शक्ल जो भी, जैसी भी हो। मगर लगता नहीं कि मौजूदा सियासी संघर्ष की नींव पर राष्ट्र जनकल्याण की ईमारत मजबूत तथा गांव, गली, गरीब किसान का भला होने वाला है। इतिहास गवाह है कि जिस तरह से आजादी से लेकर आज तक स्वस्थ, शिक्षा, संस्कृति, संस्कार, खेल के आभाव में परिवार, समाज, राष्ट्र का निर्माण हुआ है या खासकर विगत 30 वर्षो से चल रहा है। ऐसे में समृद्ध, खुशहाल, राष्ट्र समाज और परिवार की कल्पना बैमानी है। फिर मजबूरी समयकाल परिस्थिति अनुसार जो भी रही हो। 
मगर गिरोहबंद सत्ता, संगठन, संस्कृति के चलते जिस तरह से इस महान भू-भाग के महान लोकतंत्र में सत्ता, संघर्ष सेवा के नाम सर चढ़कर बोल रहा है उससे लगता नहीं कि राष्ट्रवाद या साम्राज्यवाद में बटी स्वार्थवत सियासत से इस राष्ट्र का कुछ भला होने वाला है। मगर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय जनमत ही समूचे विश्व में एक ऐसा अनूठा जनमत है जो कितना भी बैवस, मजबूर क्यों न हो। मगर समय-समय पर अपने मत का सार्थक परिणाम दें, अपनी सिद्धता साबित करता रहा है। जरूरत आज इस राष्ट्र के महान नागरिकों को यह है कि वह मतदान तो अवश्य करें। मगर मतदान करते वक्त यह अवश्य देखें और विचार करें, कि जो व्यक्ति, प्रत्याशी के लिए मत या वोट मांगा जा रहा है उसका समाज या राष्ट्र कल्याण में अभी तक क्या योगदान रहा है, क्या वह उतना सक्षम है जिस कार्य को वह पूर्ण करने की बात कहकर आपका वोट चाहता है ? फिर वह किसी भी दल, संगठन या व्यक्ति से सम्वत क्यों न हो। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आज हमारा महान समाज और राष्ट्र एक ऐसे चैराहे पर खड़ा है जहां से हमें अगले 5 वर्ष के लिए राष्ट्र व समाज के समृद्ध, खुशहाल जीवन की दिशा और दशा तय कर, अपनी आशा-आकांक्षाओं गांव, गली, गरीब, किसान के जीवन को खुशहाल समर्थ, समृद्ध बना अपनी प्रतिभाओं को संसाधन सहित प्रदर्शन के सहज अवसर मुहैया कराना है और यह तभी संभव है जब हम प्रमाण, प्रमाणिकता, अहम मुद्दे और अपनी आवश्यकताओं को सामने रख सर्वकल्याण के भाव के साथ अपने मत का निर्धारण कर, मतदान करने अवश्य जायें। तभी हम एक सशक्त और समृद्ध, खुशहाल, समाज, राष्ट्र लोकतंत्र का निर्माण कर अपनी सार्थकता सिद्ध कर सकते है। 
जय स्वराज 

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