राजे की उपेक्षा को लेकर सवाल


वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अपनी सहज, सरल, आत्मीय सेवाभावी शैली के चलते जो लोकप्रियता प्रियदर्शनी राजे ने हासिल की है और जिस तरह से सियासी तौर पर उन्हें दरकिनार किया जा रहा है उसे लेकर अब काॅग्रेस आलाकमान की घोषणाओं पर सवाल उठना शुरू हो गये है। ये अलग बात है कि वह ग्वालियर की पूर्व राजवंश की महारानी व काॅग्रेस के कद्ावर नेता काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव तथा पश्चिमी उत्तरप्रदेश  के प्रभारी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री व शिवपुरी सांसद श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया की धर्मपत्नी है। मगर उन्होंने अपनी लोकतांत्रिक सोच और संस्कारों के बल आम लोगों के बीच जो सम्मान और आत्मीय लगाव पैदा किया वह किसी से छिपा नहीं।
अगर जिस तरह से कांग्रेस में उनकी उपेक्षा को लेकर जो सवाल उठ रहे है तथा काॅग्रेस के स्तर पर देखा जा रहा है कि वह कांग्रेस के हित में नहीं। अगर कांग्रेस करो या मरो की स्थिति में राजे को प्रत्याशी बना ग्वालियर या शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में दांव लगाती हैं तो कांग्रेस की सफलता की संभावना प्रबल हो सकती है। क्योंकि जिस तरह से आम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने ग्वालियर और शिवपुरी में हाथों हाथ लिया है और आलाकमान जिस तरह से महिला सशक्तिकरण सम्मान के लिए लोकसभा, विधानसभा सहित केंद्रीय नौकरियों में 33ः आरक्षण की बात कह रहे हैं। अगर पहला प्रयोग ग्वालियर या शिवपुरी संसदीय सीट पर सफल हुआ तो यहां कांग्रेस के लिए ग्वालियर चंबल में संजीवनी साबित हो सकती है। जिससे कांग्रेस को ग्वालियर चंबल की 4 सीटों का लाभ मिल सकता है। देखना होगा कि आलाकमान कि ग्वालियर चंबल को लेकर क्या रुक रहता है। 

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