निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य, निर्वहन समृद्धि खुशहाली की गारन्टी


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
निहित स्वार्थो में आजकल जिस तरह से मानव संस्कृति तार-तार नजर आती है। ऐसे में निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन ही समर्थ समृद्ध, खुशहाल जीवन की गारन्टी हो सकती है। जो सिर्फ सपने ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य की गारन्टी है। आज जब हम एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में है। ऐसे में हमें लोकतांत्रिक ताने बानों से विदित होना आवश्यक है। जो हमारे मार्गदर्शक भी है और हर जीवन में आवश्यक भी।
हम एक ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जीवन निर्वहन करते है। जिसमें हर नागरिक, संवैधानिक, संस्थाओं के अपने-अपने कत्र्तव्य अधिकार है। जिसमें विधायिका, कार्यपालिका से लेकर पंचायतीराज, नगरीय संस्थाओं नागरिकों के अपने-अपने कत्र्तव्य अधिकार है। जिसका निष्ठा पूर्ण निर्वहन ही लोकतंत्र की खूबसूरती और समृद्धि का आधार है। जबकि लोकतंत्र को समृद्ध शसक्त बनाने के लिए होना तो चुनावों में यह चाहिए कि चुनाव के वक्त जनप्रतिनिधि आराम करें और मेहनत जनता किसी भी सच्चे-अच्छे कत्र्तव्य निष्ठ जनप्रतिनिधि को जिताने करें तथा जीतने के बाद 5 वर्ष तक वह जनप्रतिनिधि कड़ी मेहनत कर, जनता की सेवा करें। जिससे जनता सुख से जीवन व्यतीत कर अपने सपनो को साकार कर सके। मगर दुर्भाग्य कि चुनावों के दौरान उल्टा ही होता है। 
देखा जाये तो चुनाव में जनप्रतिनिधि तो दिन-रात एक कर, अपनी जीत सुनिश्चत करने ऐड़ी-चोटी का जोर लगाते है और जनता आराम फरमाती है। जो हमारे समृद्ध लोकतंत्र की विडम्बना ही कही जायेगी, जिसको समझना आवश्यक है। अगर हम ऐसा कर पाये तो कोई कारण नहीं जो कोई भी ताकत हमें हमारे समृद्ध, खुशहाल, समर्थ, जीवन से वंचित कर सके।
जय स्वराज

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