भ्रष्ट तंत्र की हनक से सनाके में लोग सत्ता बदली मगर शक्ल यथावत तबादला उद्योग में तबा होती आशा-आकांक्षा
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
भ्रष्ट तंत्र की हनक से जिस तरह से सत्ता रैंगती नजर आ रही है उससे देखकर तो बस इतना ही कहा जा सकता है कि म.प्र. में सत्ता तो बदली मगर शासन की शक्ल आज भी यथावत है। उम्मीद तो काॅग्रेस के आलाकमान राहुल गांधी के खुले मंच से आम जन की आशा-आकांक्षाओं को दिए वचन के चलते 10 दिन में रिण माफी व हर जिले में उद्योगों की स्थापना को लेकर था। मगर अघोषित रूप से फल-फूल रहे तबादला उद्योग में किसी को रोजगार मिले या न मिले। लेकिन ऐसे में उन आशा-आकांक्षाओं का दम तोड़ना स्वभाविक है। जिन्होंने 15 साल की सत्ता से त्रस्त आशा-आकांक्षाओं ने नई सरकार के रूप में राहुल पर विश्वास कर, काॅग्रेस को सत्ता सौंपी।अगर अघोषित अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिस तरह से अघोषित तौर पर शिष्टाचार के नाम भ्रष्टाचार चार कदम आगे बढ़, सेवा के नाम आर्थिक शोषण का कारण बन रहा है वह किसी से छिपा नहीं। तबादलों को लेकर अगर म.प्र. के मुख्यमंत्री की दलील यह है कि जो भाजपा का बिल्ला लेकर चलेगें, तो क्या ऐसे लोगों को पुरूस्कार मिलेगा। ऐसे में मुख्यमंत्री ही नहीं, समूची सरकार को समझने वाली बात यह है कि स्थानातांरण हो जाने के बावजूद उनमें संशोधन या उनका निरस्त हो जाना लोगों में उपजती शंका को सिद्ध करने काफी है। निश्चित ही स्थानातांरण सरकार व शासन का व्यवस्थागत अधिकार है। मगर चंद दिनों में निरस्तीकरण या संशोधन या पूर्ववत सरकार में मलाईदार पदों को सुशोभित करने वाले नामचीन नामों के स्थानातांरण में संशोधन निरस्तीकरण सबकुछ साफ करता नजर आता है। परिवहन व आबकारी सहित कई ऐसे महत्वपूर्ण विभाग है जिनकी खुली समीक्षा हो, तो सारे तथ्य आम-जन के ही नहीं, स्वयं काॅग्रेस आलाकमान के सामने होगें। जो म.प्र. से 2019 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद लगाए बैठे है। आम-जन व जन आकांक्षाओं सहित समाजसेवी, बुद्धिजीवियों के सहयोग समर्थन से प्राप्त सत्ता के हुए सियासी बटवारे से तो बैसे ही लोग परेशान थे। उस पर से तबादला उद्योग के चलते भ्रष्ट तंत्र की हनक से लोग फिलहल हैरान-परेशान है।
बहरहाल जो भी हो जिस तरह से विभिन्न भागों में बटी म.प्र. की सत्ता, सेवा, कल्याण, विकास को छोड़ सत्ता प्रदर्शन और अहंकार में डूबी है उसे देखते हुए हताश-निराश लोग 2019 में काॅग्रेस को समर्थन देगें यह यक्ष सवाल स्वभाविक रूप से यक्ष होता जा रहा है। देखना होगा कि आदर्श आचरण संहिता के मुहाने पर खड़े म.प्र. के परिणाम आने वाले समय में क्या होगें यह तो भविष्य के गर्भ में है। मगर जिस तरह से गिरोहबंद, संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता मान काॅग्रेस संगठन में पदों की बंदरवाट और जन समर्थन से प्राप्त सत्ता का संचालन चल रहा है वह काॅग्रेस के लिए शुभसंकेत नहीं कहे जा सकते।
जय स्वराज
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