काॅग्रेस सत्ता की भूखी नहीं उ.प्र. तथा राष्ट्र में गांधी परिवार का योगदान कम नही कल के लिए संघर्षरत राहुल का त्याग अहम


वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
एक शसक्त, समृद्ध, परिवार में जन्मे राहुल का दोष सिर्फ इतना है कि वह स्वार्थवत सियासत में अपने पिता स्व. राजीव गांधी की तरह नेकदिल इन्सान है। जिसकी कीमत उन्हें राजनीति की चैखट पर आने के साथ ही चुकानी पढ़ रही है। हो सकता है सियासत का सच भी यहीं हो। मगर राहुल ऐसी सियासत को स्वीकार करेगें यह भी सम्भव नहीं, देश के सबसे बड़े ताकतवर, काॅग्रेस के धुरविरोधियों से गले मिल प्रेम की सियासत का संदेश देने वाले इस नौजवान का सच जो भी हो। मगर सम्भावना पर नजर डाले तो दल के अन्दर और बाहर संघर्ष करते इस नौजवान का अपना एक भविष्य है। 
जो निश्चित ही चापलूस, चाटूकार और व्यक्तिगत, वैचारिक धुरविरोधियों को एक दिन सबक सिखाये तो कोई अति संयोक्ति न होगी और यह संभव है। सबकुछ निर्भर समय पर है। कहते है कि सत्य ने सृष्टि से लेकर आज तक किसी कर्म योद्धा को कभी निराश नहीं किया। मगर सम्भावना आज भी यक्ष है। 
देखा जाये तो आजाद भारत से पूर्व या वाद में जो योगदान संघर्ष का उ.प्र. तथा गांधी नाम, परिवार या काॅग्रेस का रहा है वह इतिहास में दर्ज है। जितने भी बड़े नेता रहे कहीं न कहीं उन्होंने काॅग्रेस का कार्य किया। फिर उनकी दिशा दशा जो भी रही है। आजादी के संघर्ष या आजाद भारत में हो सकता है कभी-कभी व्यक्ति विशेष या किसी संगठन में कुछ लोगांे में सत्ता की भूख रही हो सकती है। मगर काॅग्रेस कभी सत्ता की भूखी नहीं रही, न ही राहुल के विगत 15 वर्षो का संघर्ष सत्ता के प्रति उन्हें महत्वकांक्षी ठहराता है। अगर ऐसा होता तो 10 वर्ष कि यूं.पी.ए सरकार में वह बेहतर सत्ता सुख भोग सकते थे। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। जो एक कटु सच है।
फिलहाल देश की नहीं देश के नौजवानों के बेहतर कल और गांव, गली की समृद्धि, खुशहाली के लिए संघर्षरत अपने पिता स्व. राजीव गांधी की तरह राहुल भी अपना विजन साकार करना चाहते है तो इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। मगर इसके लिए उन्हें अपने कार्यालय सियासी सहयोगियों से इतर संपर्क, संगठन और सियासत की दशा और दिशा स्पष्ट तय करनी होगी। कारण देश के सबसे बड़े दल होने के बाद आज जिस तरह से गठबन्धन राजनीति, प्रखर, प्रवक्ता स्वीकार्य रणनीतकारों के आभाव में काॅग्रेस को तिरस्कार, अपमान झेलना पढ़ रहा है वह न तो उ.प्र. न हीं काॅग्रेस, न ही राहुल और राष्ट्र हित में है। 

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