जीत का आधार सियासत या वैचारिक अहिंसा से बड़ा अचूक अस्त्र, असंभव
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह की संस्कृति के बीच संस्कारों का प्रदर्शन हो रहा है। उसके चलते साफ है कि 2019 में जीत का आधार सियासी नहीं, बल्कि मजबूत वैचारिक होगा। कहते है कि भूतो न भविष्यते अहिंसा से बड़ा कोई अचूक अस्त्र न तो कोई हुआ है, न ही हो सकता है। बशर्ते हम अहिंसा और स्वराज के अर्थ को ठीक से समझ पाये। मगर यह तभी संभव है जब हम सृष्टि के गूढ़ रहस्य को समझ पाये जो वर्तमान शिक्षा, संस्कृति में संभव नहीं। मगर अनुभूति का एहसास सिर्फ हमारी महान संस्कृति में ही है और संस्कारों में भी। इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि जब तक कोई भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का वैचारिक अधिकार मजबूत न हो उसका लोकतंत्र में अपना अस्तित्व बचा पाना मुश्किल ही नहीं असंभव है। जिस, जिसने भी लोकतंत्र में अपना वैचारिक आधार खोया है उसे हमेशा हार का ही मुंह देखना पड़ा है।
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