लोकसभा 2019
जन दरबार में न्याय की गुहार
न्याय के अभाव में हो सकता राष्ट्र के साथ अन्याय
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
लोकसभा 2019 चुनाव की घोषणा के साथ लोकतंत्र का सबसे बड़ा जन दरबार लग चुका है। जहां तथ्य भी है और दलील भी, किसी का प्रमाणिक कार्ड, तो कोई रिपोर्ट कार्ड सहित भावी योजनाओं के माध्यम से राष्ट्र के हक में न्याय चाहता है। राष्ट्र में उसका मान-सम्मान, स्वाभिमान, गौरव है। तो राष्ट्र को सम्पूर्णता देने वाले गांव, गली के लोग और वह भू-भाग जो स्वयं सम्प्रभु है। जिसके साथ अगर जनतंत्र के दरबार में न्याय नहीं हुआ तो बड़े अन्याय की सम्भावना प्रबल है। तथ्य जो भी हो, दली जैसी भी हो, मगर न्याय आवश्यक
इसी प्रकार पंचायती, नगरीय चुनावों में गांव, गली, नगर की सरकारें वोट मत के माध्यम से हर 5 वर्ष में चुनी जाती है। मगर न्याय अन्याय की बात तो तब आती है जब राष्ट्र-जन की खातिर वोट-देते, लेते वक्त हम, राष्ट्र, राज्य, पंचायत, नगरीय चुनावी मुद्दों का मिक्स-बेज बना, अन्याय के भागीदार बन जाते है। हालात यह हो जाते है कि जब राष्ट्रीय चुनाव आते है तब हम अपने निहित स्वार्थवत कभी गांव, गली, नगर, जाति, धर्म, क्षेत्र या राज्यों को मुद्दा बनाते है। जो राष्ट्र जन दोनों के हित में नहीं, न ही इसे जन न्याय कहा जा सकता है।
बेहतर हो कि हम 2019 लोकसभा में अच्छे, सच्चे, कत्र्तव्यनिष्ठ सेवाभावी, सक्षम, समर्थ, विद्ववान जनप्रतिनिधियों को चुन, जिनका समाज, परिवार, राष्ट्र कल्याण में कोई योगदान रहा हो। व्यक्तिगत या सार्वजनिक जिससे देश के लिए एक सशक्त, सक्षम, सेवाभावी, कत्र्तव्यनिष्ठ, जबावदेह, पारदर्शी, ईमानदार सरकार चुन सके और अपने समृद्ध, खुशहाल जीवन के लिए प्रतिभा प्रदर्शन के सहज अवसर, संसाधन, स्वास्थ, शिक्षा, रोजगार, आन्तरिक, वाह-सुरक्षा, संरक्षित जीवन सुरक्षित कर स्वयं, जन, राष्ट्र को शसक्त, सक्षम बना सके। यहीं लोकसभा 2019 की सार्थकता भी होगी है और सिद्धि भी।

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