पावर प्रेसर के बीच प्यासी जनता फुटबाॅल बनती सिन्ध जलावर्धन योजना


वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
विगत 30 वर्षो से संघर्षरत शिवपुरी वासी सिन्ध के शुद्ध पेयजल को हासिल करने भले ही टकटकी लगाए बैठी हो। मगर सिन्ध है कि घरों तक आने ही तैयार नहीं। कारण साफ है कि पावर, प्रेसर और प्लालिंग की असफलता, नहीं तो कोई कारण नहीं जो 22.50 करोड़ से पूर्ण होने वाली परियोजना लगभग 100 करोड़ के पार होती। फिलहाल नई चुनौती परियोजना के तहत शहर की लगभग 15 मीटर ऊंची 14 पानी की टंकियों को भरे जाने को लेकर है। अगर पुष्ट अपुष्ट तकनीक ज्ञाताओं की माने तो यह असंभव ही है कि 15 दिन में वाटर टेंको का भरा जाना। कारण सतनबाड़ा फिल्टर प्लान्ट से खूबतघाटी तक पुरानी लाइन की जगह लौहे की नई लाइन डाली गई है। नई लाइन तक तो ठीक है। मगर जो लाइन शिवपुरी वायपास तक पानी आते-आते कई मर्तवा पानी प्रेसर के चलते फट जाती थी।  
मगर यक्ष प्रश्न यह है कि जब फिल्टर प्लान्ट से 2 मोटरों के बजाये सिर्फ मोटर से शिवपुरी वायपास हाईडेन्ट तक पानी सप्लाई हो रहा था वह भी 15 प्रतिशत प्रेसर कम करके तब लाइन फट जाती थी। जिसके चलते सतनबाड़ा फिल्टर प्लान्ट से लेकर खूबतघाटी के बीच पुरानी लाइन बदली जा रही है। अब चंूकि फिल्टर प्लान्ट खूबतघाटी के बीच लोहे की लाइन डाली जा चुकी है। मगर खूबतघाटी से शिवपुरी वायपास और शहर में मौजूद 14 वाॅटर टेंकों तक पुरानी पाइप लाइन ही पढ़ी है तथा ग्वालियर वायपास के लेवल से 15 मीटर ऊंचे टेंकों को 2 मोटरों के प्रेसर से भरा जाना है। ऐसे में यह संभव नहीं कि खूबतघाटी से वायपास तक पड़ी पुरानी पाइप लाइन प्रेसर को झेल पाये। अब इस अपराध का दोषी जो भी हो, इसे इस अपराध के लिए भले ही किसी का भी संरक्षण प्राप्त हो। मगर शिवपुरी की जनता फिलहाल भीषण गर्मी में कलफेगी या सिन्ध से शुद्ध पेयजल के आचमन करेगी। फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। 

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