अहम मौके पर राष्ट्रवादियों की चुप्पी घातक सीखने, बताने में अक्षम, असफल


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
सियासी महान भारतवर्ष का सत्य यह है कि आज हमारा महान राष्ट्र लगभग 250 वर्ष बाद एक बार फिर से यौवन पर है। जिस राष्ट्र की 65 फीसदी आबादी भीषण जीवन संघर्ष के साथ समृद्ध, सक्षम, सफल, खुशहाल, जीवन के लिए संघर्षरत हो। लगभग शेष आबादी अवसर, संसाधन सरंक्षण की मोहताज है। ऐसे में सत्ताधारी दल व विपक्षी दलों का संघर्ष की समीक्षा आवश्यक है। भले ही सत्ताधारी दल समूचे विश्व सहित राष्ट्र में राष्ट्र कल्याण सेवा के लिए संघर्षरत हो और विपक्ष सत्ता में सर्वकल्याण में। ऐसे मे हमारी शिक्षा, संस्कार, संस्कृति जो हमारे रक्त में है। वह बताती है कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्य यहीं है कि जो राष्ट्र-जन, समाज को समर्पित है। फिर पक्ष हो या विपक्ष या फिर वह संघर्षरत दल ही क्यों न हो। यहां यक्ष सवाल यह है। बेहतर दल राष्ट्र जन को साक्षी मान उसके कल्याण में अपने मत वोट के माध्यम योगदान दे और जो जिस काबिल हो उसे अपना मत दे और अपने प्रारब्ध और वर्तमान को सफल सिद्ध करें।
जय स्वराज

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