शिवपुरी में सच झूठ के बीच छिड़ा, सियासी संग्राम संवैधानिक जवाबदेही को लेकर चर्चाए सरगर्म सियासत सेवा, विकास, कल्याण बने चर्चा का विषय

वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
भले ही शिवपुरी गुना संसदीय क्षेत्र मे कांग्रेस से श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया व बसपा से प्रत्याशी की घोषणा के बाद भाजपा ने अपना उम्मीदवार घोषित न किया हो। मगर सांसद की संवैधानिक जवाबदेही को लेकर आमजन के बीच चर्चाएं अवश्य सरगर्म में है। फिलहाल सच झूठ की सियासत के बीच जीत हार के दावे जो भी हो। 
मगर विगत 20 वर्षों का सियासी इतिहास गवाह है। जहां वर्तमान सांसद विगत 20 वर्षों से लगातार अपने सेवा कल्याण विकास सद्भाव समरसता के प्रमाणिक सवालों के साथ निरंतर जीत दर्ज करा मूल्य सिद्धांतों की राजनीति पर अडिक है। तो वहीं विगत 20 वर्षों से अपनी संवैधानिक जवाबदेही को लेकर भी सजग है। अपने संसदीय क्षेत्र में आने वाले गुना, अशोकनगर, शिवपुरी के बेनागा नियमित दौरे प्रशासनिक बैठकों के साथ योजनाओं की सैद्धांतिक व्यवहारिक समीक्षा मौके पर भ्रमण व समय सीमा को लेकर प्रशासनिक तंत्र से सवाल जवाब करते रहे हैं। इसका परिणाम है कि वह विगत 20 वर्ष में क्षेत्र में हजारों करोड़ से निर्मित योजनाओं को मूर्त रूप देने में सफल रहे। फिर चाहे वह रोजगार से जुड़े नवीन निर्मित प्रशिक्षण केंद्र हो या चंदेरी की साड़ियों से संबंधित मार्केटिंग तथा 5 पत्थर खदानों की केंद्र से स्वीकृति के साथ परिवहन में नई 18 ट्रेनो का शिवपुरी आना जाना जिसमें 3600 करोड़ से निर्मित फोरलेन गुना बायपास के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में 300 करोड़ केवल पॉलिटेक्निक मेडिकल, इंजीनियरिंग काॅलेज हो या शहर-शहर, गांव-गांव, विद्युतीकरण संचार क्षेत्र में कार्य हो, जिसमें समूचे संसदीय क्षेत्र में केंद्र, राज्य सहित प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सड़कों के जाल ने समूचा क्षेत्र मुख्य मार्ग से जोड़ने में अहम भूमिका अदा की है। वहीं चंदेरी की पेयजल योजना, शिवपुरी की झील संरक्षण के अलावा तालाब उन्नयीकरण में पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम लगभग पुराने 20 तालाबों का जीर्णोद्धार शिवपुरी सिन्ध जलावर्धन योजना वह कार्य है। जिसे जवाबदेही पूर्ण करने बतौर कांग्रेसी सुनाते नहीं थकते। आदिवासी राजनीति में दखल रखने वाले रामप्रकाश कहते हैं। खेत सुधार और आवाज सेटेलमेंट वह कार्य है जिनकी सराहना होनी चाहिए। लोगों की मानें तो 15 वर्ष तक मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार के रहते व संघीय व्यवस्था के तहत हजारों करोड़ के कार्यों को मूर्त रूप दिलाना, जवाबदेही का एहसास कराने काफी है।
बहरहाल विगत 4 लोकसभा चुनावों मे जहां विपक्षी दल भाजपा से नए नए चेहरे लोकसभा में उतार सिंधिया को चुनाव में चुनौती देता रहा है। जिसमें देशराज सिंह, हरिबल्लभ, नरोत्तम, जयभान सिंह जैसे नेताओं के नाम रहे हैं। मगर सिंधिया के काम सेवा, कल्याण, विकास के आगे कोई भी सफल नहीं रहा। इस मर्तबा देखना होगा कि जबकि मुख्य चुनावी घमासान सच झूठ के बीच होना हैं। ऐसे में संवैधानिक जवाबदेही की प्रमाणिकता ही असल मुद्दा रहने वाली है। यह कहना जल्दबाजी होगी, मगर ऐसे में संघीय व्यवस्था जिसमें केंद्र पैसा मुहैया कराता है और राज्य क्रियान्वयन करता है तथा सेवा, कल्याण, सुगम बनाना राज्य व स्थानीय संस्था, पंचायत नगर पालिका की जवाबदेही होती है यह आज हर नागरिक को समझने बात होना चाहिए है।

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