गांधी की सार्थकता को लेकर, सुब्बाराव जी से बतियाये स्वराज मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले


विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
महान गांधीवादी एस.एन सुब्बाराव से गांधी विचार की सार्थकता, वर्तमान परिपेक्ष्य में लेकर, बतियाये स्वराज मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले से बतियाते हुए श्री सुब्बाराव ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि परिपेक्ष्य जो भी हो। मगर गांधी विचार की सार्थकता कभी खत्म नहीं हो सकती, न ही वह कभी अप्रसांगिक हो सकता है। क्योंकि गांधी दर्शन का आधार सत्य और उसकी सार्थकता है और उन्होंने समूचे जीवन काल में ही इसे सिद्ध करके दिखाया और जिसने भी गांधी दर्शन को आत्मसात किया वह किसी न किसी रूप में भारतवर्ष ही नहीं समूचे विश्व में कहीं न कहीं सिद्ध रहा है यहीं गांधी दर्शन की सिद्धता है।
कभी जिस ब्रितानियां हुकूमत या लाल निशान समूचे विश्व में नजर आता था। आज वह विश्व मानचित्र में ढूंढ़े नहीं मिलता। क्योंकि समृद्ध, खुशहाल जीवन का मूल मंत्र सत्य, अहिंसा और प्रेम है। जिसका गांधी जी ने सम्पूर्ण जीवन निषठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन किया और यहीं सर्व धर्मो, मत, पंथों का संदेश है। उम्रदराज हो चुके एक थैला 2 नैकर शर्ट के साथ अनुशासित संयमित जीवन निर्वहन करने वाले सुब्बाराव यूं तो स्वयं को घुमक्कड़ कहते है। जिन्होंने प्रेम सदभाव, शान्ति के लिए अमेरिका से लेकर एशिया व कई खाड़ी देशों में सर्व धर्म सभा, प्रार्थना के कार्यक्रम करते रहे है और गांधी दर्शन को जिन्दा ही नहीं बल्कि उन्होंने स्वयं के जीवन में भी आत्मसात किया। 
मगर उन्हें राजनैतिक दलों पर अफसोस और भारतवर्ष के युवाओं से बड़ी उम्मीद है। वह कहते है कि यह राजनीति का दुर्भाग्य है कि जो कार्य राजनैतिक दलों को करना चाहिए वह समाजसेवी लोग, संगठन कर रहे है। मगर युवाओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भारत वह महान भू-भाग है जहां कुछ भी सम्भव है और यह कई मर्तवा सिद्ध हो चुका है। जय जगत का नारा ही हमारी सबसे बड़ी धरोहर है। जिसे सजोकर रखना हर मानव का कत्र्तव्य होना चाहिए। 

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