शिवपुरी में जल उद्योग शुरू


वीरेन्द्र शर्मा
विेलेज टाइम्स समाचार सेवा।
पिछले वर्ष 600 का टेंकर भीषण गर्मी में कितने का बिचेगा फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। 600 रूपये में 600 लीटर हर महीने शुद्ध पेयजल पीने चुकाने पड़ते है। अब इसे शिवपुरी का सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि रोजगार तो कलफते लोगों को रोजगार भले ही नसीब न हुआ हो। मगर शुद्ध पेयजल या नहाने-धोने के जल तथा रोजगार के नाम खनन, रेत, रशद, शराब, उद्योग अघोषित रूप से फिलहाल चरम पर है। 
कहते है कि किसी भी सत्ता सरकार का पहला कत्र्तव्य उस जन, नागरिक को जीवोत्पार्जन के लिए रोजगार व रोजगार के अवसर सहज, शुद्ध पेयजल सहित सस्ती शिक्षा मुहैया कराना होता है। मगर दुर्भाग्य कि शिवपुरी में यह अहम सुविधा भी लोगों को सहज उपलब्ध नहीं। अफसोस और शर्मनाक बात तो यह है कि लाखों, करोड़ों रूपया शुद्ध पेयजल के नाम ठिए-ठिकाने लगाने वाली संस्थाओं तथा सरकारों के रहते शुद्ध पेयजल सप्लाई के कई पेयजल प्लान्ट शहर में खुले हुए है। तो वहीं सैंकड़ों पानी के टेंकर शहर की गलियों में दिन-रात फर्राटे भरते घूम रहे है। 
ये अलग बात है कि सैंकड़ों करोड़ के शराब व्यवसाय व अघोषित रूप से करोड़ों रूपये के खनन, रेत, रशद व्यवसाय पर व्यवस्थापकों की चुप्पी समझ से परे हो सकती है। मगर शुद्ध पेयजल तो हर नागरिक को मुनासिब दाम पर हासिल करना अधिकार है। मगर दुर्भाग्य कि न तो आज तक ऐसा हो सका और न ही जबावदेह लोगों के खिलाफ कोई ऐसी कार्यवाही जिसे सराहा जा सके। देखना होगा कि जबावदेह व मोटी पगार समेट स्वयं का भला करने में जुटी संस्थायें इस भीषण गर्मी में शुद्ध पेयजल के लिए कलफते लोगों का कितना संज्ञान ले पाती है। 

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