सत्ता के लिए एक मर्तवा फिर से आर-पार के मूड में सियासी दल सियासी दलों के बीच छिड़ी सत्ता की जंग


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
सियासी दलों के बीच छिड़ी सत्ता की जंग का सच जो भी हो। मगर राष्ट्र-जन का कितना भला इस जंग से होने वाला है यह देखने वाली बात होगी। फिलहाल परिणाम भविष्य के गर्भ में है। मगर राष्ट्र-जन को 2019 में समझने वाली बात यह होना चाहिए कि दो धुव्रों में बट चुके सियासी दलों का सच यह है कि जिस तरह से वह विगत 30 वर्षो से सत्ता हासिल कर सत्ता सुख उठा अपना विस्तार करते आये है, वह किसी से छिपा नहीं। इस दौरान राष्ट्र-जन सेवा, कल्याण, विकास के नाम जिस बेरहमी से राष्ट्र और जन लुटा है। जिस तरह से राष्ट्र-जन अपनी महान शिक्षा, संस्कृति, संसाधन, स्वास्थ के लिए कलफा है वह किसी से छिपा नहीं। इस दौरान राष्ट्र-जन, सेवा, कल्याण विकास के नाम सत्तासीन लोगों ने भोले भाले लोगों की भावनाओं को किस तरह छलनी किया है और आम गांव, गरीब अपनी महान शिक्षा, संस्कृति, संसाधन स्वास्थ के लिए कलफा है जिसने शिक्षा, संस्कृति, संस्कार, स्वस्थ, समृद्ध, खुशहाल जीवन के ही मायने बदल डाले। कहते है भूल गलती या विरासत में मिला स्वभाव मनुष्य का स्वभाविक गुण है। जिसे दरकिनार नहीं किया जा सकता, न ही अस्वीकार्य किया जा सकता। मानवीय सभ्यता कहती है कि पूर्वजों के समय परिस्थिति, अनुसार वर्तमान पीढ़ी पर न तो गर्भ किया जा सकता है, न ही उन्हें अपराधी ठहराया जा सकता है, यह एक कटू सच हैै। जिसे राष्ट्र-जन समाज, व्यक्ति, सियासी दलों को समझना होगा। मगर जिस तरह से एक नेकदिल इन्सान और राष्ट्र कौम को समर्पित इन्सान के बीच सियासी संघर्ष चर्मोत्सकर्ष पर है। जिसमें संस्कृति, संस्कार और सियासत सभी दांव पर है। सारे सिद्धान्तों और व्यवहारों को दरकिनार कर, सत्ता, संघर्ष छिड़ा है। ऐसे में राष्ट्र जन की भूमिका अहम है। उस महान मतदाता का वह मत जिसने अच्छे-अच्छे समर्थ, शक्तिशाली लोगों को पुरूस्कृत करने या दण्ड देने में कभी कोई गुरेज नहीं किया, न ही कोई कोताही बर्ती इतिहास गवाह है। 
बेहतर हो कि यह महान राष्ट्र-जन एक मर्तवा फिर से अपने मान, सम्मान, स्वाभिमान सहित समृद्ध, खुशहाल वर्तमान भविष्य के लिए अपनी प्रमाणिकता सिद्ध कर पूर्व की भांति सटीक निर्णय दे, यही हम भारतवासियों की सिद्धता, सफलता और सार्थकता होगी। सत्ता 2019 में जिसकी भी हो, जिससे आज यह महान राष्ट्र जन भले ही अनभिज्ञ हो। अगर प्रयास सत्य को साक्षी मान सफल हुये तो कोई कारण नहीं, जो इस महान राष्ट्र-जन को महान भारत वर्ष बनने से रोक सके।
जय स्वराज

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