खुशहाली को तरसता समृद्ध, देश


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है मानव ही नहीं समस्त जीव, जगत, सृष्टि में सृजन हेतु अपने प्राकृतिक नैसर्गिक गुणों के आधार पर स्वच्छंद खुशहाल सार्थक, सफल जीवन का अन्तिम लक्ष्य रखता है। जो उसका नैसर्गिक कत्र्तव्य और अधिकार भी है। मगर अफसोस कि हम एक समृद्ध, शिक्षित, संस्कारिकता भू-भाग विरासत के उतराधिकारी न तो उन्हें सुरक्षित रख, संरक्षित कर पाये, न ही अपनी नस्लों को अपने महान संसाधनों को संरक्षित कर सहज अवसर उपलब्ध करा पाये। जिस समृद्ध विरासत और महान भू-भाग पर हम गर्व कर स्वयं को गौरान्वित मेहसूस करते थे। बेहिसाब कुर्बानियों से प्राप्त आजादी के पश्चात भी हम विगत 30 वर्षो में सुरक्षित नहीं रख पाये। बल्कि छदम लोकतंत्र और सत्ता के लिए स्वार्थवत धन पिपासुओं के समूहों, व्यक्तियों ने दूध, दही, छांच, नीर और खाद्य औषधि, प्राकृतिक संपदा के भंडार ही नहीं शारीरिक, बौद्धिक, अध्यात्मिक प्रतिभाओं वाले इस महान भू-भाग, राष्ट्र को छदम स्वार्थवत नीतियों के माध्यम से पंगू बना उसके पुरूषार्थ को बदनाम करने का कार्य हुआ। परिणाम सामने है कि कभी समूचे विश्व को खुशहाल, समृद्ध, जीवन का दर्शन देने वाला राष्ट्र अपनों के बीच इतना बैवस, हताश, निराश निर्वल होगा यह उन त्याग-तपस्या, बेहिसाब कुर्बानियां देने वाले महापुरूषों ने भी सपने न सोचा होगा।
कहते है मानव ही नहीं हर जीव, जगत के जीवन पर आधा प्रभाव उसके नैसर्गिक गुणों का तो आधा प्रभाव शिक्षा, संगत का होता है। आज जिस तरह हम पैट्रोलियम, ड्रग, इलेक्ट्राॅनिक, खाद, फूड और वैधाानिक सूतखोरी के माया जाल में उलझ व्यापार का हब बन गये है यह हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है। कारण धर्म, जाति, भाषा, झूठे, प्रलोभनों से परिपूर्ण नीति नियोक्ताओं भ्रामक प्रचार के बीच हम अपने अमूल्य वोट की ताकत का सही इस्तेमाल न कर गवांते रहे। जिससे किसी का भला होने वाला नहीं। विनाश का इससे बड़ा और कोई दूसरा उदाहरण किसी भी सभ्य समाज में नहीं हो सकता। जिस भू-भाग पर औषधि खादन्न, सर्वोत्तम पोस्टिक आहार जल, जंगल, जमीन पर प्रचूर मात्रा में हो, उस भू-भाग पर 50 फीसदी से अधिक मातायें अल्प रक्त की शिकार, दूध छाच के बचाये गांव, गलियों में शराब की दुकान और कुपोषित बच्चों की भरमार साबित करती है कि हम अपनो के ही बीच कितने सफल, असफल रहे इसीलिए आज मौका है कि अपना मत किसी भी ऐसे जनप्रतिनिधि को दे जो सच्चा, अच्छा, सेवाभावी और राष्ट्र, मानव, जीव, जगत सहित इस महान भू-भाग को समर्पित हो। 
जय स्वराज

Comments

Popular posts from this blog

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता