प्रतिभा, संरक्षण, सम्बर्धन से इतर सियासी दलों का सत्ता संग्राम संस्कार बोलते है, सियासत, सत्तायें जैसी भी, जो भी रही हो
व्ही.एस.भुल्ले
विलेेज टाइम्स समाचार सेवा।
300 वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद इस महान राष्ट्र का सियासी दौर एक मर्तवा फिर से हमारे महान संस्कार, शिक्षा, संस्कृति, सियासत, सत्ताओं को लेकर फिर से नाजूक दौर में है। जब हमारे जन-तंत्र और सियासत को अपना पुरूषार्थ सिद्ध कर, यह साबित ही नहीं, सिद्ध भी करना है कि सरकारें, सत्तायें आयेंगीं और जायेंगीं। मगर यह महान राष्ट्र व इसकी शिक्षा, संस्कृति, संस्कार, स्वाभिमान, सुरक्षित, संरक्षित रहे और यह तभी संभव है जब हम हमारी प्रतिभाओं को संरक्षण दें, उनके सम्बर्धन के साथ अपनी महान शिक्षा, संस्कृति, संस्कारों को संरक्षित, सम्बर्धन करने एक सहज, सशक्त, सेवाभावी, कल्याणकारी, जनप्रतिनिधि सहित हम सरकार चुन पाये। कहते है समय, परिस्थिति, पीढ़ी जो भी हो, मगर वह कभी अपने अनुवांशिक, नैसर्गिक गुणों संस्कारों से मुंह नहीं मोड़ सकती। इतिहास गवाह है कि अनादिकाल से स्वार्थवत सत्तायें स्वयं की समृद्धि तथा धन लालसा व अहंकारी अपने अहंकार के चलते इस महान राष्ट्र और इस राष्ट्र के न्यायप्रिय भोले-भाले लोगों के साथ छल करते आये है। मगर ऐसी स्वार्थवत सत्ताओं और लोग इस राष्ट्र में जब-तब छणिक रूप से तो सफल रहे है। मगर कभी सम्पूर्ण सफल नहीं हुए यहीं महत्वपूर्ण बात आज समूचे राष्ट्र-जन सहज, सियासी दल संगठन, समूह, व्यक्ति को समझने वाली बात होनी चाहिए। जिस तरह से आज अपने-अपने निर्धारित एजेन्डों के तहत वैचारिक, व्यक्तिगत, समूह, संगठन के रूप में 2019 में जो लोग स्वयं को सत्तासीन होते देखना चाहते है या ऐसी सत्ताओं को जो लोग चुनना चाहते है उन्हें समझना होगा कि राष्ट्र-जन व जीव-जगत की सेवा, कल्याण से बड़ा न तो कोई कर्म हो सकता है, न ही धर्म। आज जब समय ने हमें अपना पुरूषार्थ सिद्ध करने का मौका दिया है। हम जैसे भोले-भाले न्यायप्रिय लोगों को जिन्होंने अपने विधान से ऊपर महान संविधान को अंगीकार किया है। ऐसे में हमें 2019 में ऐसे सच्चे-अच्छे ईमानदार सेवाभावी, कत्र्तव्य निष्ठ जबावदेह, जनप्रतिनिधि चुन एक सशक्त, सेवाभावी कल्याणकारी सरकार चुने, जो हमारी प्रतिभा, संरक्षण, सम्बर्धन के साथ शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों को संरक्षित कर इस राष्ट्र को समृद्ध, खुशहाल और संस्कारिक बना सके।
जय स्वराज
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