सेवा, सर्वकल्याण को समर्पित सार्थक सच ग्वालियर.चम्बल बना मिशाल

                                                                             वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।

ये अलग बात है कि जब आज की राजनीति में स्वार्थ सर्वोपरि और सेवा कल्याण दूसरे पायदान पर होए ऐसे में सियासी लोगए सत्ताए सरकार और सियासत का सच समझना आवश्यक है। जहां लोग स्वयं के स्वार्थ के लिए सुबह से शाम तक संघर्ष करने नजर आते होए तो कोई अपनी विरासत को संरक्षित करए बढ़ाते नजर आते हो। ऐसे में सेवाए सर्वकल्याण को समर्पित सच का विश्लेषण आवश्यक हो जाता है। 
देखा जाये तो ग्वालियर.चम्बल ही नहींए समूचे मण्प्रण् में कई सियासी लोग अपने और स्वयं की स्वार्थ पूर्ति हेतु सियासत में स्थापित हुए और उन्होंने सत्ता और सियासत का वह मुकाम भी हासिल किया। जिसके लिए शख्सियत आज भी सियासत में संघर्षरत है। मगर विगत 20 वर्षो में एक नाम ऐसा भी सियासी हल्कों में सियासतदारों के बीच स्थापित हुआ है जिसकी सम्पूर्ण दौलत सेवा और सर्व कल्याण ही रहा और उसके सार्थक प्रमाण आज की सियासत में आम लोगों के बीच है। जो यह सिद्ध करने काफी है कि पारिवारिक संस्कारए संस्कृतिए सर्वकल्याण और सेवा उन्मुखी क्या होती है व जीवन में सिद्धान्तों का क्या महत्व होता है। यह अखिल भारतीय काॅग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व उत्तप्रदेश के प्रभारी श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने 20 वर्ष के कार्यकाल में कर दिखाया। बात जब सच और झूठ की हो और सियासी जंग का लक्ष्य भी सच और झूठ को। ऐेसे में सच से मुखातिब होना आम नागरिक के लिए जरूरी हो जाता है। अगर हम इतिहास पर नजर डालेए तो वियावान जंगल भोले.भाले लोगों के बीच स्थापित आजादी से पूर्व सिंधिया राजवंश ने इसे सजाने.सवारने लोगों के विकास और उन्हें सहज सहूलियत मुहैया कराने की शुरूआत 100 वर्ष पूर्व ही कर दी थी। जिसमें धर्मए संस्कृतिए सिद्धान्तोंए संस्कारों के साथ सर्वकल्याण निहित था। आज से 100 वर्ष पूर्व जहां ग्वालियर सूटिंगए बिड़ला मिलए कल पुर्जे बनानेए उद्योगए मंगाराम बिस्कुटए इंजीनियरिंग काॅलेजए मेडीकल काॅलेजए रेलए सड़कए वन्य जीवए उद्यानए फर्सीए तिघरा सहित पेयजलए पशु और निस्तारी तालाबांे की हर शहरए गांव में श्रृंखलाए क्लबए खेल.मैदान जैसी बेहतर सुविधायें मौजूद थी। वहीं एक अत्याधुनिक आईडियल सर्वसुविधा युक्त शहर के रूप में सीपरि गांव को सिंधिया स्टेट की राजधानी के रूप में सर्व सुविधा युक्त बना उसे प्राकृतिक रूप से वातानुकूलित बनाया गया। जहां वोटिंगए पर्यटन से लेकर पोलोए छोटे.मोटे उद्योगए होटलए रेलए बेहतर सड़के धान के साथ सुशोभित करए सुन्दर बनाया गया। 
अगर आजादी के बाद की बात करें तो समूचा बामौरए उद्योग क्षेत्र मालनपुर और सितौली में स्पीरिंग कारखाना तथा ग्वालियर में नये विषयों की विश्व विद्यालयों में शुरूआतए ग्रामीण क्षेत्रों में नवोदय विद्यालयए नई.नई रेलों का संचालन आॅवर ब्रज हवाई अड्डेए अन्तराष्ट्रीयए खेल.हाॅकी मैदानए गुनाए विजयपुर में नेशनल फर्टिलाईजर उद्योग और गुना से लेकर ईटावा तक नई रेल लाईनए टूरिस्ट विलेज सेन्टर जैसे कई कार्य रहे। जिसको आगे बढ़ाते हुए स्थापित सिद्धान्त और संस्कारों की राजनीति को आत्मसातए सेवा कल्याण के मार्ग को आत्मसात करने वाले श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी राजनैतिक पारी की शुरूआत लगभग 20 वर्ष पूर्व शुरू की। तब गुना संसदीय क्षेत्र में सड़कए रेलए बिजलीए पानीए शैक्षणिक संस्थानए रोजगार जैसी समस्यायें सबाव पर आ चुकी थी। जिसको एक चैलेंस मान उन्होंने सार्थक परिणामों की यात्रा की। परिणाम कि आज शिवपुरी से चंडीगढ़ए अर्मतसरए इन्दौरए मुम्बईए दिल्लीए आगरा और पुड़ेए गुजरातए सूरत के लिए लगभग 8 ट्रेने चल रही है। वहीं शिवपुरी स्पेशल के उन्नीकरण के साथ लोगों को परिवहन सुविधा उपलब्ध की। जिस रोडए आगरा.मुम्बई राजमार्ग को आज से 15 पूर्व एक्सीडेंटल जाॅन माना जाता था वह ग्वालियर.शिवपुरीए गुनाए व्यावराए देवास तक फाॅरलेन स्वरूप ले चुकी है। रहा सवाल रोजगार का तो चंदेरी की साड़ी और गुनाए अशोकनगर डिजाईन प्रशिक्षण केन्द्र शिवपुरी में मेडीकल काॅलेज एवं एशिया में नम्बर 2 पावर तथा इंजीनियरिंग काॅलेजए वहीं शिवपुरी शहर की सबसे अहम समस्या शुद्ध पेयजल जिसकी गुणवत्ता परियोजना में बोतलों में बिचने वाले पेयजल लेवल की निर्धारित की गई तथा सड़कों के माध्यम से विभिन गांवों को जोड़ने का जो क्रम शुरूआत आज उसका परिणाम है जिन गांव में पहुंचने गांवों को 4.4 घंटे लगते थे आज वहां घंटे डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकता है। वहीं खेलों के लिए भी नवीन खेलो का मैदान इस बात का प्रमाण है कि सच क्या है। 
काश समूची सियासत में सच के मायने इस तरह से सेवाए कल्याण सिद्धान्तों और मूल्यों की राजनीति के साथ देखे जाये। तो कोई कारण नहीं जो आज के समय में बदनाम होती राजनीति को दिशा देंए उसकी सटीक दशा तय की जा सके। देखा जाये तो विगत 15 वर्षो में विपक्षी दल की सरकार के रहते विकास कार्यो को सेवा कल्याण के कार्यो को अवरूद्ध किए बिना उनकी रफ्तार को कायम रखए परिणाम देना कोई साधारण बात नहीं। मगर यह काम क्षेत्रीय सांसद ने सेवा कल्याण के रूप में अपने क्षेत्र में दियाए तो वहीं ऊर्जा मंत्री रहते कम बाॅल्टेज की बिजली को पर्याप्त बाॅल्टेज के साथ गांव.गांव पहुंचाने बाॅल्टेज और बिजली समस्या के समाधान के लिए शहरी एवं ग्रामीण राजीव गांधी विघुतीकरण योजना के माध्यम में लगभग साढ़े 2200 करोड़ रूपया मण्प्रण् को दिलाए ऐतिहासिक कार्य किया। एक जबावदेह राजनेता के रूप में और मूल सिद्धान्तों की राजनीति सहित सेवा कल्याण में विश्वास रखने वाले सिंधिया ने सूखाए ओलावृृष्टिए किसान आंदोलनों में किसानों के साथ हुए अन्याय के समय उनके साथ कंधे से कंधा मिला संघर्ष करनाए तो वर्षो तक कभी काली पट्टी बांधए तो कभी मालाओं का त्याग करए गरीबए गांवए किसान के न्याय के लिए सत्ताधारी दल से अकेले ही संघर्ष किया। जिसमें भोपाल में किया गया। उनका सत्याग्रह किसानों की खातिर मण्प्रण् ही नहींए देश की राजनीति में याद रखने योग्य बात है। अब जबकि समूचे देश में सच झूठ को लेकर संकल्प और न्याय को लेकर चुनावी युद्ध छिड़ा है। ऐसे में सियासी लोगों को शिवपुरी आकर देखना ही नहींए सिंधिया की दिनचर्या उनकी कार्यप्रणाली को देखना चाहिए। क्योंकि इतिहास गवाह है कि भयंकर बारिश हो या भीषण गर्मी 40 डिग्री तापमान के बीच जेब में प्याज डाल सैंकड़ों किलोमीटर की यात्रा करए गांवए गरीब के बीच नियमित जाना उनकी समस्या सुनना समाधान खोजना और परिणाम देना शायद अब उनकी दिनचर्या का भाग बन चुका है। जिस तरह से उन्होंने समूचे प्रदेश में एक युवा नेता के रूप में जान फूकने का कार्य और 15 वर्ष पुरानी सत्ता को जन समर्थन के चलते सत्ता से विधा किया। इसी का परिणाम है कि काॅग्रेस आलाकमान ने उत्तरप्रदेश जैसे राज्य जहां काॅग्रेस लगभग खत्म हो चुकी है कि जबावदेही सौंप उन्हें प्रभारी बनाया हैं। देखना होगा कि जिस राजनेता ने अपने क्षेत्र के लिए दिन.रात एक कर और विपक्षी दलों के रहते जो सेवाए सर्वकल्याण और विकास के कार्यो को हजारों करोड़ों की लागत से मूर्तरूप दिलाए अपनी जबावदेही सिद्ध की है। उस क्षेत्र की जनता इस सच और मौजूद सियासत का किस तरह आकलन करती है। यह आज समूचे ग्वालियर.चम्बल ही नहींए मण्प्रण् को समझने वाली बात होना चाहिए और मौजूूद सियासत को भी।

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