गांधी को नमन पर विचारों पर कफन, शर्मनाक- व्ही.एस.भुल्ले
कहते है धर्म, मत, पंथ, विचार में भिन्नता हो सकती है, मगर लक्ष्य एक ही होता है। गांधी दर्शन भी लगभग इसी के इर्द-गिर्द है। मगर आजाद भारत में जिस तरह से गांधी जी को नमन और उनके विचारों को कफन तैयार करने का कार्य सत्तामद में चूर, सत्ताओं ने किया है। वह इस महान भारतवर्ष के लिए दर्दनाक भी है और शर्मनाक भी। गांधी कोई नाम नही बल्कि जीवन्त विचार है। जो जीवन में कभी अप्रशासिंग नहीं हो सकता। मगर सत्ता उन्माद और सत्ता मद में डूबे लोगों के लिए भले ही सिर्फ नाम हो सकता है। देखा जाए तो समृद्ध, खुशहाल जीवन का यह जीवन्त आधार है। इस सत्य को सत्ता, सियासी दलों को समझना चाहिए और अपने कत्र्तव्य निर्वहन निष्ठापूर्ण ढंग से करना चाहिए। क्योंकि सृष्टि में उन्माद, हिंसा का कभी कोई स्थान न रहा, न ही हो सकता है। सार्थक, सफल जीवन में इतिहास गवाह है कि नैसर्गिक गुण आधार और निष्ठापूर्ण अनुशासित कत्र्तव्य निर्वहन ही जीवन के सृजन को सार्थक सिद्ध कर सकता है। जय स्वराज
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