धन, दधिचियो का नंगा नाच अक्षम्य


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह से पशु-पक्षी, जीव, जन्तु ही नहीं, मानव को दांव पर लगा मानवता को कलंकित करने वालो की फौज इस महान भूभाग पर अज्ञानता निहित स्वार्थ बस बढ़ रही है वह शर्मनाक भी है और दर्दनाक भी। काश हम अपनी महान शिक्षा अध्यात्म, सभ्यता, संस्कृति, संस्कारों को सुरक्षित रख पाये। मगर सबसे बड़े दर्द और शर्म की बात तो यह है कि हम अपने द्वारा निर्धारित सत्ता में अपने विद्या, विद्ववान प्रतिभाओं को आवश्यक अवसर नहीं जुटा पाये। 
यह कटू सच है कि अगर हम अपने विधा, विद्ववान, प्रतिभाओं को संरक्षण दे, उन्हें उचित अवसर मुहैया करा पाये तो प्रतिभायें विदेशी भूभाग की मोहताज न होगी। क्योंकि हम उचित शिक्षा के आभाव में आज हम हर क्षेत्र में निपुण प्रबन्धक और नौकर तथा मस्तक विहीन फौज तैयार कर रहे है। यह हमारी सबसे बड़ी अक्षमता, असफलता है जो आज नहीं तो कल हमारी असफलता, अक्षमता सिद्ध करने काफी है। काश इस सच को हम समझ पाये अपने ही हाथों अपनी महान प्रतिभाओं का दमन इससे बड़ा दंश किसी भी मानवीय सभ्यता, जीव-जगत के लिए कोई हो नहीं सकता।
जय स्वराज

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