प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में बड़े घोटाले की आशंका
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
लगभग अघोषित माफिया अंदाज में संचालित किसी संस्था के कर्तव्य निर्वहन का सच इतना कड़वा हो सकता है। संवैधानिक संस्थाओं में आस्था रखने वाले भोले वाले नागरिकों ने भी कभी सपने में भी ना सोचा होगा। मगर यह कटू सच है कि जिस तरह से ग्रामीण सड़कों के निर्माण में क्वालिटी से समझौता कर निर्माण हुआ वह किसी से छुपा नहीं। परिणाम कि कई रपटा, पुलिया दम तोड़ रहे हैं तो कहीं-कही सड़कों के परखच्चे उड़ चुके हैं।
कारण नियुक्त दक्ष कंसलटेंट कंपनियों के नाम अपात्र संसाधन विहीन लोगों का कंसलटेंट कम्पनियों में काम करना और दक्ष बन जाना है। जहां तक उधड़ी सड़कों के सुदृढ़ीकरण का सवाल है। तो सुदृढ़ीकरण के नाम करोड़ों फूंकने के बाद क्या हुआ देखा जा सकता है। हालात यह है कि जिस तरह से राजनैतिक संरक्षण या कर्तव्य विहीन धन लालचियो ने संवैधानिक दायित्वों के विरुद्ध अघोषित रूप से माफिया राज को संरक्षण दे रखा है वह मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में देखने लायक है।
बहरहाल जो भी हो जिस तरह की चर्चाएं फिलहाल मध्यप्रदेश की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क प्राधिकरण इकाई को लेकर सर गर्म है यह ग्रामीण विकास मंत्री, प्रमुख सचिव सी.ई.ओ को देखने वाली बात होनी चाहिए।

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