सियासी तूफान में अस्तित्व का संकट


व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
देश के राष्ट्रीय दल सहित प्रादेशिक क्षेत्रीय दल अपने अपने मुद्दों को लेकर भले ही अपनी-अपनी जीत के लिए सजग रह, ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हो। मगर भोले भाले भावुक लोगों के देश में सत्ता के लिए मचा कोहराम किसी से छिपा नहीं मगर सियासी दल है कि स्वर्ण रजीत रथो पर सवार भावनाओं की पताकाऐ फहरा सत्ता संग्राम में जुटे हैं। भले ही स्वार्थ स्वर्ण रजित रथो के तले आशा आकांक्षाएं दम तोड़ने पर मजबूर हो। मगर सत्ता हासिल करने मद में चूर लोगों को किसी की परवाह कहां ? जीवन मूल्य सिद्धांतों की चिन्ता पर रोटी सेकती सियासत को शायद यह अनुमान नहीं कि इस महान भूभाग की जनता बेबस मुफलिस मजबूर हो सकती है मगर कभी सत्य और स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकती। यह आज सभी को समझने वाली बात होना चाहिए।

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