कानून की धज्जियां उड़ाते, पालनहार बगैर बिल के म.प्र. में 20 हजार करोड़ का कारोबार आम मतदाता की जान से खिलबाड़
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
म.प्र. में यूं तो आबकारी महकमा वाणिज्यकर के अधीन आता है जो फिलहाल जीएसटी से भी बाहर है। मगर किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संवैधानिक संस्था खुद ही कैसे कानून की धज्जियां उड़ा सकती है। जबकि उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा के लिए कई संस्थायें कानून के तहत विराजमान है। आखिर कोई भी संवैधानिक संस्था या उसके अधीन ठेकेदार कैसे उपभोक्ता को बगैर बिल दिये रोजाना लाखों, करोड़ों, अरबों का व्यापार कर सकता है। अरबों ही नहीं म.प्र. में तो यह व्यापार लगभग 20 हजार करोड़ के आसपास होने की संभावना है। जबकि आबकारी महकमें का मसला तो सीधे-सीधे खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता की जीवन रक्षा से जुड़ा है फिर बगैर बिल के कैसे हजारों करोड़ का व्यापार चल रहा है। यह बात आज मतदाता और संवैधानिक संस्थाओं को समझने वाली बात होनी चाहिए।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
म.प्र. में यूं तो आबकारी महकमा वाणिज्यकर के अधीन आता है जो फिलहाल जीएसटी से भी बाहर है। मगर किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी संवैधानिक संस्था खुद ही कैसे कानून की धज्जियां उड़ा सकती है। जबकि उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा के लिए कई संस्थायें कानून के तहत विराजमान है। आखिर कोई भी संवैधानिक संस्था या उसके अधीन ठेकेदार कैसे उपभोक्ता को बगैर बिल दिये रोजाना लाखों, करोड़ों, अरबों का व्यापार कर सकता है। अरबों ही नहीं म.प्र. में तो यह व्यापार लगभग 20 हजार करोड़ के आसपास होने की संभावना है। जबकि आबकारी महकमें का मसला तो सीधे-सीधे खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता की जीवन रक्षा से जुड़ा है फिर बगैर बिल के कैसे हजारों करोड़ का व्यापार चल रहा है। यह बात आज मतदाता और संवैधानिक संस्थाओं को समझने वाली बात होनी चाहिए।
जय स्वराज

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