श्राफ मुक्ति की शुरुआत करेगा स्वराज सामर्थ, समृद्ध, प्रदेश में संसाधनों की दुर्दशा सभाषद, परिषद मुखिया मंत्रियों की अग्नि परीक्षा
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
यह अलग बात है कि जम्मू दीप,
आर्यव्रत भरतखंडे के नाम से चिरपरिचित इस महान भू भाग आज भारतवर्ष के नाम से जाना जाता है। जिसका अध्यात्म प्राकृतिक समृद्धि, सामर्थ, पुरुषार्थ, शिक्षा, संस्कृति का अपना एक सुनहरा इतिहास, है जिसकी प्रमाण, प्रमाणिकता समूचे विश्व में किसी से छिपी नहीं है।
मगर जाने अनजाने में गोवंश के साथ हुए घोर अन्याय अत्याचार को भी भुलाया नहीं जा सकता। अगर सैकड़ों वर्ष बाद राष्ट्रभक्त, संगठन कांग्रेस की ओर से उस गोवंश के संरक्षण संवर्धन की शुरुआत मध्यप्रदेश में गौ सेवकों, संगठनों, प्रबुद्ध वर्ग की पहल पर हुई है तो उसे सटीक अंजाम तक ले जाना स्वराज में आस्था रखने वालों का धर्म भी है और कर्म भी और मानवीय सभ्यता का उत्तरदायित्व भी। जम्मू दीप और आर्यव्रत भरतखंडे के उत्तराधिकारियों का दायित्व है कि वह अपनी मूल, सभ्यता, संस्कृति, शिक्षा को पहचान एक नई शुरुआत 2019 में करें जिससे श्राफ मुक्ति का मार्ग तो प्रस्तसत होगा ही साथ ही एक राष्ट्रभक्त संगठन को भी घोर श्राप से मुक्ति मिलेगी। क्योंकि सामर्थ, पुरुषार्थ के साथ स्वास्थ्य शिक्षा का मूल भाव और भविष्य गौ सेवा संवर्धन से जुड़ा है। जो सामर्थ पुरुषार्थ समृद्धि की खान है। हमें समझना होगा कि जिस गोवंश की सेवा स्वयं प्रभु कृष्ण ने की और गौ धूली को चंदन मान मस्तिष्क की शोभा बनाया आज उसका तिरस्कार ही सबसे बड़ा श्राप है। अगर श्राफ ग्रस्त राष्ट्रभक्त संगठन प्राशिचत को तैयार है और मानवता स्वयं को मानव कहने तो स्वराज के इस महान अभियान मैं अपनी योग्यता श्रम अनुसार बचे समय का योगदान दें इस महान भूभाग को हम समृद्ध, खुशहाल, सशक्त होने के साथ अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी सामर्थ बना सकते हैं। जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार ही नहीं समृद्धि के नए कीर्तिमान स्थापित होते हैं तो आज की पीढ़ी के लिए यह आठवां अजूबा होगा। तो वहीं सभासद, परिषद, मुखिया, मंत्रियों के लिए सार्थक कदम होगा। अगर केंद्र व राज्य सरकार का सामंजस्य ठीक रहा तो इस महान भूभाग की जी.डी.पी. 50 अरब डॉलर ही नहीं 100 अरब के पार होगी और विश्व अर्थव्यवस्था में स्वीकार होने के साथ देश में सार्थक और सफल भी होगी।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
यह अलग बात है कि जम्मू दीप,
आर्यव्रत भरतखंडे के नाम से चिरपरिचित इस महान भू भाग आज भारतवर्ष के नाम से जाना जाता है। जिसका अध्यात्म प्राकृतिक समृद्धि, सामर्थ, पुरुषार्थ, शिक्षा, संस्कृति का अपना एक सुनहरा इतिहास, है जिसकी प्रमाण, प्रमाणिकता समूचे विश्व में किसी से छिपी नहीं है।
मगर जाने अनजाने में गोवंश के साथ हुए घोर अन्याय अत्याचार को भी भुलाया नहीं जा सकता। अगर सैकड़ों वर्ष बाद राष्ट्रभक्त, संगठन कांग्रेस की ओर से उस गोवंश के संरक्षण संवर्धन की शुरुआत मध्यप्रदेश में गौ सेवकों, संगठनों, प्रबुद्ध वर्ग की पहल पर हुई है तो उसे सटीक अंजाम तक ले जाना स्वराज में आस्था रखने वालों का धर्म भी है और कर्म भी और मानवीय सभ्यता का उत्तरदायित्व भी। जम्मू दीप और आर्यव्रत भरतखंडे के उत्तराधिकारियों का दायित्व है कि वह अपनी मूल, सभ्यता, संस्कृति, शिक्षा को पहचान एक नई शुरुआत 2019 में करें जिससे श्राफ मुक्ति का मार्ग तो प्रस्तसत होगा ही साथ ही एक राष्ट्रभक्त संगठन को भी घोर श्राप से मुक्ति मिलेगी। क्योंकि सामर्थ, पुरुषार्थ के साथ स्वास्थ्य शिक्षा का मूल भाव और भविष्य गौ सेवा संवर्धन से जुड़ा है। जो सामर्थ पुरुषार्थ समृद्धि की खान है। हमें समझना होगा कि जिस गोवंश की सेवा स्वयं प्रभु कृष्ण ने की और गौ धूली को चंदन मान मस्तिष्क की शोभा बनाया आज उसका तिरस्कार ही सबसे बड़ा श्राप है। अगर श्राफ ग्रस्त राष्ट्रभक्त संगठन प्राशिचत को तैयार है और मानवता स्वयं को मानव कहने तो स्वराज के इस महान अभियान मैं अपनी योग्यता श्रम अनुसार बचे समय का योगदान दें इस महान भूभाग को हम समृद्ध, खुशहाल, सशक्त होने के साथ अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी सामर्थ बना सकते हैं। जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार ही नहीं समृद्धि के नए कीर्तिमान स्थापित होते हैं तो आज की पीढ़ी के लिए यह आठवां अजूबा होगा। तो वहीं सभासद, परिषद, मुखिया, मंत्रियों के लिए सार्थक कदम होगा। अगर केंद्र व राज्य सरकार का सामंजस्य ठीक रहा तो इस महान भूभाग की जी.डी.पी. 50 अरब डॉलर ही नहीं 100 अरब के पार होगी और विश्व अर्थव्यवस्था में स्वीकार होने के साथ देश में सार्थक और सफल भी होगी।
जय स्वराज

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