कोहराम को तैयार कर्तव्य, विमुख व्यवस्था

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
मगर सत्य का सारथी यह महान भूभाग इस बात का साक्षी है कि जिस तरह से हमारे अपनो की स्थापित व्यवस्था में हमारे अपने नौनिहाल यह महान भूभाग, भविष्य हमारी प्रतिभाये, विधा विद्वान, मेहनतकस, सेवा भावी, सृजन को समर्पित लोग हताश-निराश है वह किसी से छिपा नहीं। उदाहरण स्वरूप हम देखे तो इस महान भूभाग का जर्रा जर्रा विभिन्न प्रतिभाओं से पटा पड़ा है। प्राकृतिक संपदाओं के अथार्य भंडार गर्व करने के बजाए स्वयं पर शर्म महसूस कर रहे हैं। स्थापित व्यवस्था में मौजूद संस्थाओं के संस्कार, कर्तव्य विमुख तो व्यवस्थाओं को स्वीकारने वाले खुद को गुलाम और व्यवस्था को अंगूठा दिखाने वाले आजाद हैं। जिस तरह से लोकतंत्र के नाम जवाबदेही की लाश पर कर्तव्य विमुखता का विलाप चल रहा है वह शर्मनाक है। और जिस तरह के अपराध नहीं जघन्य अपराध हमारे बीच हो रहे हैं जिस तरह से सेवा, शिक्षा स्वास्थ्य, पेयजल के मुंह मांगे बाजार फल फूल रहे हैं तथा खुलेआम प्राकृतिक संपदा की लूट और सेवा के नाम जनधन के नए-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं। यह ना तो जन, राष्ट्रहित में है ना ही इंसानियत हित में जो सभी को समझने वाली बात होनी चाहिए।

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