बजट व्यवहारिक ही नहीं उसका मूल आधार प्राकृतिक सिद्धान्त अनुरूप हो

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
हम समृद्ध, खुशहाल थे
, है और रहेगें। आज जरूरत नई शुरूआत के साथ, शिक्षा, प्रतिभा, सम्मान के साथ विद्या, विद्ववानों को सहज न मिलने वाले अवसरों के पहचान की है। जो प्रकृति से सामजस्य बैठा विज्ञान और व्यवहार में बेहतर सामजस्य स्थापित कर अपने हुनर की सिद्धता साबित कर समूचे विश्व को सटीक स्पष्ट संदेश दें सके और समूची पृथ्वी पर मौजूद जीव जगत के जीवन को समृद्ध, खुशहाल बनाने की दिशा में अपनी भूमिका तय कर सके। मगर यह तभी संभव है जब इस महान भूभाग पर कत्र्तव्य निर्वहन निष्ठा, और पूर्ण ईमानदार होने के साथ राष्ट्र-जन को समर्पित हो और व्यवहारिकता के काफी नजदीक जो यह तय करने काफी हो कि प्रकृति अनुकूल क्या यथा संभव है और क्या असंभव। 
जय स्वराज

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