सही दिशा में देश बड़े न्याय पर सदन की मोहर
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अनगिनत विसंगतियों से भरे समाज राष्ट्र में सियासत सत्ता के संरक्षण में लोकतंत्र का लाभ उठा राष्ट्र-जन को कलंकित करने वाली कुप्रथा, संस्कार, संस्कृति के दो-तरफा सुधार से इतना तो तय है कि विगत 30 वर्ष में सत्ता, सियासत, समाजों में गहरी पैठ बना चुकी बुराईयों का अन्त होना तय है। जिस तरह से राष्ट्र-जन की खातिर बुराईयों पर दो-धारी तलवारों से लोकतांत्रिक तरीकों से संवैधानिक प्रहार और सुधार के प्रयास तेज हो रहे है। उनके चलते कहा जा सकता है कि देश अब सही दिशा में है।
ऐसे में सिर्फ सत्ता, सियासत या उन सरकारांे की सराहना ही काफी नहीं। सराहना तो ऐसे सांस्कृति, सामाजिक, संगठनों सहित उन कार्यकर्ताओं तथा विधा, विद्ववानों की होना चाहिए। जिन्होंने विगत 30 वर्षो से हताश-निराश राष्ट्र-जन के बीच अपने कड़े परिश्रम, त्याग, कत्र्तव्य निर्वहन कृतज्ञता से राष्ट्र-जन को आशा की किरण दिखा गर्व और स्वयं को गौरान्वित होने का अवसर मुहैया कराया है। शैक्षणिक, सांस्कृतिक, धार्मिक रूप से फैली भ्रान्ती और भ्रम फैलाने वालों पर सामाजिक सियासी संवैधानिक उपचार के साथ स्वच्छन्द विकास के उपलब्ध वातावरण से साफ है कि हम समृद्धि, खुशहाली की ओर अग्रसर हो रहे है। अग्रसर तो हम अपने उस समृद्ध, सामर्थशाली, पुरूषार्थ और गौरव की ओर भी है। जिसे हमने कभी अपने निहित स्वार्थ, उपकंटाओं, महत्वकांक्षाओं की खातिर काल-कलवित कर कलंकित किया था। मगर सार्थक, स्वीकार्य, प्रमाणिक, समाधान के लिए आवश्यक है हमारी सत्ताओं को उस ज्ञान-विज्ञान, विद्ववानों की जिनसे वोट, सत्ता, सियासत के चलते न तो संपर्क ही शेष रहा, न ही संवाद के वो मार्ग जिनको सुनिश्चित करना आज की आवश्यकता है। जिससे हम अपने खोये गौरव को पुनः प्राप्त कर इस महान राष्ट्र-जन तथा भूभाग को समृद्ध, खुशहाल बना सके और सहज स्वच्छन्द रूप से विधा, विद्ववानों की सभा, गोष्टी, ज्ञान का ऐसा मंच तैयार कर सके जिससे नये मार्ग स्थापित हो।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अनगिनत विसंगतियों से भरे समाज राष्ट्र में सियासत सत्ता के संरक्षण में लोकतंत्र का लाभ उठा राष्ट्र-जन को कलंकित करने वाली कुप्रथा, संस्कार, संस्कृति के दो-तरफा सुधार से इतना तो तय है कि विगत 30 वर्ष में सत्ता, सियासत, समाजों में गहरी पैठ बना चुकी बुराईयों का अन्त होना तय है। जिस तरह से राष्ट्र-जन की खातिर बुराईयों पर दो-धारी तलवारों से लोकतांत्रिक तरीकों से संवैधानिक प्रहार और सुधार के प्रयास तेज हो रहे है। उनके चलते कहा जा सकता है कि देश अब सही दिशा में है। ऐसे में सिर्फ सत्ता, सियासत या उन सरकारांे की सराहना ही काफी नहीं। सराहना तो ऐसे सांस्कृति, सामाजिक, संगठनों सहित उन कार्यकर्ताओं तथा विधा, विद्ववानों की होना चाहिए। जिन्होंने विगत 30 वर्षो से हताश-निराश राष्ट्र-जन के बीच अपने कड़े परिश्रम, त्याग, कत्र्तव्य निर्वहन कृतज्ञता से राष्ट्र-जन को आशा की किरण दिखा गर्व और स्वयं को गौरान्वित होने का अवसर मुहैया कराया है। शैक्षणिक, सांस्कृतिक, धार्मिक रूप से फैली भ्रान्ती और भ्रम फैलाने वालों पर सामाजिक सियासी संवैधानिक उपचार के साथ स्वच्छन्द विकास के उपलब्ध वातावरण से साफ है कि हम समृद्धि, खुशहाली की ओर अग्रसर हो रहे है। अग्रसर तो हम अपने उस समृद्ध, सामर्थशाली, पुरूषार्थ और गौरव की ओर भी है। जिसे हमने कभी अपने निहित स्वार्थ, उपकंटाओं, महत्वकांक्षाओं की खातिर काल-कलवित कर कलंकित किया था। मगर सार्थक, स्वीकार्य, प्रमाणिक, समाधान के लिए आवश्यक है हमारी सत्ताओं को उस ज्ञान-विज्ञान, विद्ववानों की जिनसे वोट, सत्ता, सियासत के चलते न तो संपर्क ही शेष रहा, न ही संवाद के वो मार्ग जिनको सुनिश्चित करना आज की आवश्यकता है। जिससे हम अपने खोये गौरव को पुनः प्राप्त कर इस महान राष्ट्र-जन तथा भूभाग को समृद्ध, खुशहाल बना सके और सहज स्वच्छन्द रूप से विधा, विद्ववानों की सभा, गोष्टी, ज्ञान का ऐसा मंच तैयार कर सके जिससे नये मार्ग स्थापित हो।
जय स्वराज
Comments
Post a Comment