मुखिया की कार्यशैली और सरकार के संचालन को लेकर सवाल

वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
म.प्र. में धनाधन हो रहे ट्रान्सपर और नियुक्तियों को लेकर भले ही वैचारिक आधार सिद्ध करने की कोशिश कितनी ही क्यों न हो। मगर म.प्र. सरकार के मुखिया की कार्य प्रणाली से जुदा सरकार की कार्यशैली समूचे प्रदेश में फिलहाल चर्चा का विषय है। देखा जाये तो कमलनाथ को जिस कार्यशैली के लिए भारतीय राजनीति में जाना जाता है उसके उलट उनकी सरकार की कार्यशैली पर सवाल होना स्वभाविक है। जिस तरह से सरकार बनने के पश्चात प्रशासनिक सर्जरी के नाम थोकबंद तबादलों का दौर चल रहा है और तरह-तरह की चर्चाऐं सियासी गलियारों में गूंज रही है उनका सरकार के मुखिया की कार्यशैली के विरूद्ध जाना अपने-आप में एक सियासी सवाल है। 
देखा जाये तो अब समूचे म.प्र. के सियासी गलियारों से लेकर सत्ता के गलियारों तक सवालों की जो सुगबुहाट है उससे समूची आशा-आकांक्षायें मायूस है और राजनीति के पंडित भी अब इस उधेड़बुन में जुट गये है कि कमलनाथ सरकार का संचालन आखिर वह कौन व्यक्ति कर रहा है जिसके इशारे पर सारा संचालन हो रहा है। कम से कम सियासत में दखल रखने वालों की माने तो सरकार जिस ढर्रे पर चल रही है वह कमलनाथ की कार्यशैली कतई नहीं हो सकती। अब जबकि सिंधिया जैसे कद्दावर नेता संगठन और सत्ता दोनों से बाहर है और कमलनाथ का अक्स सरकार की कार्यशैली से कोशो दूर तो ऐसे में यक्ष सवाल यहीं है कि परदे के पीछे से सरकार चलाने वाला चह व्यक्ति कौन है और काॅग्रेस आलाकमान इतना बैवस क्यों, जो उसकी मंशा अनुसार न तो म.प्र. में काॅग्रेस संगठन का विस्तार हो पा रहा है, न ही सरकार की कार्य प्रणाली से कुछ ऐसा निकल पा रहा है जो काॅग्रेस के हित में हो। वचन पत्र की आढ़ में जिस तरह से काॅग्रेस अपने मूल आधार से दूर होती जा रही है उसके परिणाम तो आने वाला भविष्य ही तय करेगा। 
अगर इसी तरह की कार्य प्रणाली चलती रही और समय गुजरता गया तो न तो काॅग्रेस को आने वाले समय में कुछ हासिल होने वाला है, न ही म.प्र. के गांव, गली, गरीब का कल्याण होने वाला है। देखना होगा कि म.प्र. सरकार के मुखिया कमलनाथ या काॅग्रेस आलाकमान म.प्र. सरकार की कार्य प्रणाली को कैसे लेते है। 
जय स्वराज

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