मुकेश तिवारी विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 72वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने बुद्धिजीवियों के बीच अनौपचारिक चर्चा के दौरान कहा कि संविधान से विमुख सत्तायें, शासक ही स्वराज के मार्ग में बड़ी बाधा है। जब तक सत्ताओं का सर्वोत्तम समर्पण उनकी आस्था संविधान की मंशा अनुरुप नहीं होगें तब तक स्वराज का सपना अधूरा ही रहेगा। क्योंकि जिस तरह से आजाद भारत में संविधान की भावना अनुरुप सत्तायें राष्ट्रीय भावना एवं कानून का राज स्थापित करने में असफल, अक्षम साबित होती रही है। उसके पीछे के कारण जो भी रहे हो। मगर वर्तमान साक्ष्य इस बात के गवाह है कि कार्य तो हुआ मगर पूर्ण मनोयोग से नहीं हो सका। परिणाम कि जो निष्ठा पूर्ण भागीदारी राष्ट्र जनकल्याण में राष्ट्रजनों की होना थी। उसका मार्ग हमारी सत्तायेंं सुनिश्चित कर,उसे प्रस्त नहीं कर पायी। संसाधन बेतहासा अंदाज में लुटते रहे, सिकुड़ते संसाधनों, सुविधाओं, सेवाओं के चलते अभावग्रस्त लोग बैवस, मजबूर, बिलबिलाते रहे। मगर हमारी सत्तायें उनको ढांढस बधा, उनके आंसू पोछने में अक्षम, असफल साबित होती रही।...
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