निलंबन नहीं बर्खास्त की हो, कत्र्तव्य विमुखता का पैमाना

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
ज्ञात हो कि हालिया तौर पर माननीय न्यायालय द्वारा किसी प्रकरण को लेकर टिप्पणी की गई थी जिसकी चर्चा बौद्धिक वर्ग में भी आम रहती थी कि अगर प्रशासनिक व्यवस्था में उम्मदा सुधार करना है तो शासकीय कर्मचारी का निलंबन सिर्फ काफी नहीं बल्कि कत्र्तव्य विमुख व्यक्ति को सेवा से बर्खास्त करना चाहिए। क्योंकि निलंबन अब पर्याप्त कारक बेहतर सेवाओं में नहीं रहा। कारण कि निलंबन के दौरान मिलने वाले वेतन भत्ते कत्र्तव्य विमुख व्यक्ति के लिए पुरूस्कार ही होते है, न कि दण्ड। देखना होगा कि सरकारें व शासन माननीय न्यायालय व आम नागरिकों की मंशा को किस तरह से लेते है।  

Comments

Popular posts from this blog

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता