सरकार सिद्ध करे ईमानदारी प्राश्चित का वक्त
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
सरकार की ईमानदारी सिद्ध करने का सवाल भले ही सत्ताधारी दल से हो, मगर हकीकत में वक्त सिद्धता और सवालों से इतर प्राश्चित का है। देखा जाये तो म.प्र. काॅग्रेस जिस श्राफ के दंश को झेल निस्तानाबूत होने की ओर अग्रसर है तथा म.प्र. सरकार की ईमानदारी को लेकर जिस तरह से सवाल यक्ष है। ऐसे में लगता है कि म.प्र. में काॅग्रेस के लिए प्राश्चित करने का वक्त आ चुका है। आज सवाल सरकार की ईमानदारी सिद्ध करने तक सीमित नहीं। बल्कि सवाल तो अनजाने में ही सही म.प्र. की सत्ता के लिए जो बेजुबानों के विरूद्ध पूर्व में हुए जघन्य नैतिक अपराध से जुड़ा है। जो अन्याय जघन्य अपराध गऊ-चर की भूमि को राजस्व घोषित कर, गौवंश को भूखा मर, दर-दर भटकने तथा तालाब, नालों के कैचमेन्ट ऐरियों पर बढ़ते दबंगों के अतिक्रमण ने प्यासे मरने छोड़ दिया था वह भी सिर्फ सत्ता और वोट की खातिर।
कहते है दुनिया में धन और मां दो ऐसे शब्द है जिनका सम्मान, सिद्धता, स्वीकार्यता अनादिकाल से मानव जगत में रही है। मगर दुर्भाग्य कि म.प्र. में सत्ता व वोट की खातिर वह कलंकित जाने-अनजाने में अपमानित हुए है। जिसने अनगिनत असहनीय अन्याय, अत्याचार झेलने को हमारी गौवंश और पशुधन को मजबूर किया है। आज उसी गौवंश की पितृ-दिव्य आत्मा का श्राफ म.प्र. ही नहीं, म.प्र. की सत्ता और काॅग्रेस को काल-कलवित करने तैयार है।
बेहतर हो पहले म.प्र. में सत्ता काॅग्रेस सेवा, संस्कार, जीवन मूल्य, संस्कृति की सिद्धता गौवंश के पुर्नस्थापित सम्वर्धन संरक्षित कर, स्वयं की सिद्धता साबित करें, फिर कोई नई शुरूआत करे। क्योंकि जिस मंद गति से गौवंश, सरंक्षण, सम्बर्धन का कार्य शुरू हुआ है उसमें अभी भी सटीक समझ और सेवा कल्याण की व्यापक गुंजाईस मौजूद है जो इस म.प्र. को ही नहीं, इस प्रदेश की सत्ता सहित काॅग्रेस को समृद्ध, खुशहाल बना, गौ श्राफ के कलंक से मुक्त करा सकती है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
सरकार की ईमानदारी सिद्ध करने का सवाल भले ही सत्ताधारी दल से हो, मगर हकीकत में वक्त सिद्धता और सवालों से इतर प्राश्चित का है। देखा जाये तो म.प्र. काॅग्रेस जिस श्राफ के दंश को झेल निस्तानाबूत होने की ओर अग्रसर है तथा म.प्र. सरकार की ईमानदारी को लेकर जिस तरह से सवाल यक्ष है। ऐसे में लगता है कि म.प्र. में काॅग्रेस के लिए प्राश्चित करने का वक्त आ चुका है। आज सवाल सरकार की ईमानदारी सिद्ध करने तक सीमित नहीं। बल्कि सवाल तो अनजाने में ही सही म.प्र. की सत्ता के लिए जो बेजुबानों के विरूद्ध पूर्व में हुए जघन्य नैतिक अपराध से जुड़ा है। जो अन्याय जघन्य अपराध गऊ-चर की भूमि को राजस्व घोषित कर, गौवंश को भूखा मर, दर-दर भटकने तथा तालाब, नालों के कैचमेन्ट ऐरियों पर बढ़ते दबंगों के अतिक्रमण ने प्यासे मरने छोड़ दिया था वह भी सिर्फ सत्ता और वोट की खातिर। कहते है दुनिया में धन और मां दो ऐसे शब्द है जिनका सम्मान, सिद्धता, स्वीकार्यता अनादिकाल से मानव जगत में रही है। मगर दुर्भाग्य कि म.प्र. में सत्ता व वोट की खातिर वह कलंकित जाने-अनजाने में अपमानित हुए है। जिसने अनगिनत असहनीय अन्याय, अत्याचार झेलने को हमारी गौवंश और पशुधन को मजबूर किया है। आज उसी गौवंश की पितृ-दिव्य आत्मा का श्राफ म.प्र. ही नहीं, म.प्र. की सत्ता और काॅग्रेस को काल-कलवित करने तैयार है।
बेहतर हो पहले म.प्र. में सत्ता काॅग्रेस सेवा, संस्कार, जीवन मूल्य, संस्कृति की सिद्धता गौवंश के पुर्नस्थापित सम्वर्धन संरक्षित कर, स्वयं की सिद्धता साबित करें, फिर कोई नई शुरूआत करे। क्योंकि जिस मंद गति से गौवंश, सरंक्षण, सम्बर्धन का कार्य शुरू हुआ है उसमें अभी भी सटीक समझ और सेवा कल्याण की व्यापक गुंजाईस मौजूद है जो इस म.प्र. को ही नहीं, इस प्रदेश की सत्ता सहित काॅग्रेस को समृद्ध, खुशहाल बना, गौ श्राफ के कलंक से मुक्त करा सकती है।
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