रोड मेफ न डी.पी.आर कैसे बने समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र विजन, अवसर, सुरक्षित, आयडिया, विद्या, विद्यवानों के अभाव में दम तोड़ता त्याग कल्याण विद्याचोर हाइटेक संस्कृति में दम तोड़ती प्रतिभायें
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है, विजन, अवसर, आयडिया, विद्या, विद्यवानों का हुनर असुरक्षित और विद्याचोर, संस्कृति चर्मोत्कर्ष पर हो, ऐसे में बगैर रोड मैफ, डी.पी.आर के कैसे समृद्ध, राष्ट्र बनेगा। यह इस महान भूभाग पर चर्चा का विषय होना चाहिए। जिस पर बहस हो, इसका प्रचार-प्रसार हो और आज यह सबसे बड़ा मुद्दा भी होना चाहिए।
ऐसे में यह तय करना हम भारतवर्ष के नागरिकों का कत्र्तव्य ही नहीं जबावदेही भी होना चाहिए और अवसर, आयडिया, विद्या, विद्यवानों का संरक्षण भी। क्योंकि जिस तेजी के साथ इन्टरनेट तकनीक और हाइटेक भावुक तकनीक के सहारे सोशल मीडिया सतत सत्ता के लिए संगठित लोगों का समूह, अघोषित तौर पर काॅरपोरेट कल्चर या संस्कृति के नाम गिरोहबंद, संगठन सक्रिय है। ऐसे में न तो हम भारतीय संस्कृति, शिक्षा के पथ भ्रष्ट करने वाली ताकातों से स्वयं व अपने नौनिहालों के भविष्य को सुरक्षित रख पायेगें, न ही अपनी प्रतिभा, विद्या, विद्यवानों को उनकी क्षमता प्रदर्शन के उचित अवसर मुहैया करा समृद्ध भारत का व्यवहारिक विजन, आयडिया, रोड मैफ, डी.पी.आर तैयार कर इस महान राष्ट्र को आजादी के 70 वर्ष बाद उसका मान-सम्मान दिला उसे समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र बना पायेगे। अगर हम वाक्य में समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र बनाना चाहते है। तो हमारे स्पष्ट विजन होने के साथ विद्या, विद्यवानों आयडिया को संरक्षण को सुरक्षित करना होगा। साथ ही व्यवहारिक रोड मैफ के साथ डी.पी.आर पर काम करना होगा और उस महान संस्कृति को आंकड़े, प्रतिशत के मकड़जाल से निकल उसे जिन्दा कर सम्र्बधित करना प्रतिभाओं को उचित मान-सम्मान के साथ उन्हें नाम मिल सके। इतना ही नहीं जब तक हम विद्या, विद्यवान, भावनाओं, संस्कृति पर पार पा अपने सामर्थ पुरूषार्थ को सिद्ध नहीं कर लेते तब तक न तो हमें सार्थक परिणाम मिलेगें न ही हमारे प्रयास सफल सिद्ध होगें। ऐसे हालातों में हम प्रचार-प्रसार में तो पारंगत हो अपनी अक्षमता, असफलता तो सिद्ध साबित कर सकते है। मगर प्रमाणिक परिणाम नहीं दे सकते। यह हमें आज समझने वाली बात होनी चाहिए।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है, विजन, अवसर, आयडिया, विद्या, विद्यवानों का हुनर असुरक्षित और विद्याचोर, संस्कृति चर्मोत्कर्ष पर हो, ऐसे में बगैर रोड मैफ, डी.पी.आर के कैसे समृद्ध, राष्ट्र बनेगा। यह इस महान भूभाग पर चर्चा का विषय होना चाहिए। जिस पर बहस हो, इसका प्रचार-प्रसार हो और आज यह सबसे बड़ा मुद्दा भी होना चाहिए।ऐसे में यह तय करना हम भारतवर्ष के नागरिकों का कत्र्तव्य ही नहीं जबावदेही भी होना चाहिए और अवसर, आयडिया, विद्या, विद्यवानों का संरक्षण भी। क्योंकि जिस तेजी के साथ इन्टरनेट तकनीक और हाइटेक भावुक तकनीक के सहारे सोशल मीडिया सतत सत्ता के लिए संगठित लोगों का समूह, अघोषित तौर पर काॅरपोरेट कल्चर या संस्कृति के नाम गिरोहबंद, संगठन सक्रिय है। ऐसे में न तो हम भारतीय संस्कृति, शिक्षा के पथ भ्रष्ट करने वाली ताकातों से स्वयं व अपने नौनिहालों के भविष्य को सुरक्षित रख पायेगें, न ही अपनी प्रतिभा, विद्या, विद्यवानों को उनकी क्षमता प्रदर्शन के उचित अवसर मुहैया करा समृद्ध भारत का व्यवहारिक विजन, आयडिया, रोड मैफ, डी.पी.आर तैयार कर इस महान राष्ट्र को आजादी के 70 वर्ष बाद उसका मान-सम्मान दिला उसे समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र बना पायेगे। अगर हम वाक्य में समृद्ध, खुशहाल राष्ट्र बनाना चाहते है। तो हमारे स्पष्ट विजन होने के साथ विद्या, विद्यवानों आयडिया को संरक्षण को सुरक्षित करना होगा। साथ ही व्यवहारिक रोड मैफ के साथ डी.पी.आर पर काम करना होगा और उस महान संस्कृति को आंकड़े, प्रतिशत के मकड़जाल से निकल उसे जिन्दा कर सम्र्बधित करना प्रतिभाओं को उचित मान-सम्मान के साथ उन्हें नाम मिल सके। इतना ही नहीं जब तक हम विद्या, विद्यवान, भावनाओं, संस्कृति पर पार पा अपने सामर्थ पुरूषार्थ को सिद्ध नहीं कर लेते तब तक न तो हमें सार्थक परिणाम मिलेगें न ही हमारे प्रयास सफल सिद्ध होगें। ऐसे हालातों में हम प्रचार-प्रसार में तो पारंगत हो अपनी अक्षमता, असफलता तो सिद्ध साबित कर सकते है। मगर प्रमाणिक परिणाम नहीं दे सकते। यह हमें आज समझने वाली बात होनी चाहिए।
जय स्वराज
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