दो धारी तलवार पर स्थिर, नाथ सरकार अधर में काॅग्रेस
वीरेन्द्र शर्मा
अगर म.प्र. में सियासी चर्चाओं की माने तो निर्दलीय, सपा, बसपा के समर्थन से सत्ता में स्थापित काॅग्रेस की कमलनाथ सरकार के समर्थन में भाजपा के दो विधायकों की वोटिंग और 4 नम्बर और नाथ सरकार के पक्ष में होने की चर्चाऐं सरगर्म होने से साफ है कि दो धारी तलवार पर सवार म.प्र. की कमलनाथ सरकार स्थिर ही नहीं, मजबूत दिखाई देती है। जिससे साफ है कि कमलनाथ काॅग्रेस और म.प्र. सरकार के लिए एक कुशल प्रबंधक ही नहीं, बल्कि बडे़ कुशल संचालक भी साबित हो रहे है। क्योंकि जिस तरह से कमलनाथ ने अध्यक्ष रहते अपने कुशल प्रबंध से दिग्विजय, सिंधिया को साथ लें काॅग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया तथा फ्लोर टेस्ट के दौरान विपक्षी दल के मजबूत संगठन के रहते अपनी सरकार के समर्थन में दो विधायकों को लाकर यह साबित कर दिया कि वह संगठन और सत्ता को मजबूत बना, उसे स्थिर रखने में पारंगत है। जहां तक वेटिंग इन 4 विधायकों का सवाल है जिसकी चर्चा आज समूचे म.प्र. में सरगर्म है।
ये अलग बात है कि इस सियासी खेल में परदे के पीछे का सच जो भी हो और इस खेल का उस्ताद जो भी हो। मगर जिस स्थिर के साथ म.प्र. में काॅग्रेस और उसकी सरकार खड़ी है हो सकता है उसका असल खिलाड़ी जो भी हो। मगर फिलहाल सियासी सच यह है कि सरकार भी म.प्र. में स्थिर मजबूत है और सेवा कल्याण का मार्ग भी स्पष्ट। मगर काॅग्रेस संगठन का आने वाला भविष्य क्या होगा फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। सियासी चर्चाऐं तो यहां तक है कि अगर काॅग्रेस आलाकमान और स्वयं कमलनाथ ने उस्तादों के संगठन और सियासी मंसूबों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में परिणाम चैकाने वाले हो सकते है।
अगर म.प्र. में सियासी चर्चाओं की माने तो निर्दलीय, सपा, बसपा के समर्थन से सत्ता में स्थापित काॅग्रेस की कमलनाथ सरकार के समर्थन में भाजपा के दो विधायकों की वोटिंग और 4 नम्बर और नाथ सरकार के पक्ष में होने की चर्चाऐं सरगर्म होने से साफ है कि दो धारी तलवार पर सवार म.प्र. की कमलनाथ सरकार स्थिर ही नहीं, मजबूत दिखाई देती है। जिससे साफ है कि कमलनाथ काॅग्रेस और म.प्र. सरकार के लिए एक कुशल प्रबंधक ही नहीं, बल्कि बडे़ कुशल संचालक भी साबित हो रहे है। क्योंकि जिस तरह से कमलनाथ ने अध्यक्ष रहते अपने कुशल प्रबंध से दिग्विजय, सिंधिया को साथ लें काॅग्रेस को सत्ता तक पहुंचाया तथा फ्लोर टेस्ट के दौरान विपक्षी दल के मजबूत संगठन के रहते अपनी सरकार के समर्थन में दो विधायकों को लाकर यह साबित कर दिया कि वह संगठन और सत्ता को मजबूत बना, उसे स्थिर रखने में पारंगत है। जहां तक वेटिंग इन 4 विधायकों का सवाल है जिसकी चर्चा आज समूचे म.प्र. में सरगर्म है। ये अलग बात है कि इस सियासी खेल में परदे के पीछे का सच जो भी हो और इस खेल का उस्ताद जो भी हो। मगर जिस स्थिर के साथ म.प्र. में काॅग्रेस और उसकी सरकार खड़ी है हो सकता है उसका असल खिलाड़ी जो भी हो। मगर फिलहाल सियासी सच यह है कि सरकार भी म.प्र. में स्थिर मजबूत है और सेवा कल्याण का मार्ग भी स्पष्ट। मगर काॅग्रेस संगठन का आने वाला भविष्य क्या होगा फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। सियासी चर्चाऐं तो यहां तक है कि अगर काॅग्रेस आलाकमान और स्वयं कमलनाथ ने उस्तादों के संगठन और सियासी मंसूबों पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में परिणाम चैकाने वाले हो सकते है।
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