जनाकांक्षा जबावदेही वचन पत्र से भरा बजट बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिला सहित स्वास्थ, शिक्षा, संसाधनों की उपलब्धता पर जोर
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
ये अलग बात है कि खाली खजाने से जूझती म.प्र. की कमलनाथ सरकार पर किसान रिण माफी से लेकर काॅग्रेस के वचन पत्र को पूर्ण करने का भार है। इसके बावजूद म.प्र. बजट 2019-20 में जो 2 लाख 33 हजार 606 करोड़ का होना संभावित है। जिसमें लगभग 46 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान कृषि और किसान को है। बच्चे, युवा, महिला, बुजुर्गो से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और म.प्र. की समृद्धि, खुशहाली सुनिश्चित करने सेवा, कल्याण एवं संसाधनों की उपलब्धता के लिए भी प्रावधान किया है।
मगर कमलनाथ सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती धन उपलब्धता और योजनाओं प्रभावी क्रियान्वयन की होगी क्योंकि किसी योजना का सटीक क्रियान्वयन ही उसकी सफलता और उसकी प्रमाणिकता का मूल आधार होता है। ये अलग बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बेहतर प्लानर प्रबन्धकों में गिने जाते है और उनकी टीम भी प्रभावी है। देखना होगा कि महाराष्ट्र से सटे घने जंगलों के बीच विगत 30-35 वर्षो में छिन्दबाड़ा जैसे सबसे पिछड़े गरीब क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने वाले कमलनाथ खाली खजाने पर जनाकांक्षा अनुरूप वचन पत्र के साथ म.प्र. के गांव, गली को समृद्ध, खुशहाल कैसे बना पाते है। मगर सबसे बड़ी चुनौती 2019 में कमलनाथ सरकार के सामने गौशाला, गौवंश का संरक्षण, सम्बर्धन की होगी जिसके अक्स से म.प्र. में काॅग्रेस सरकार आकार ले सकी और 15 वर्ष के वनवास पश्चात सत्ता सिंहासन तक पहुंची है।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
ये अलग बात है कि खाली खजाने से जूझती म.प्र. की कमलनाथ सरकार पर किसान रिण माफी से लेकर काॅग्रेस के वचन पत्र को पूर्ण करने का भार है। इसके बावजूद म.प्र. बजट 2019-20 में जो 2 लाख 33 हजार 606 करोड़ का होना संभावित है। जिसमें लगभग 46 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान कृषि और किसान को है। बच्चे, युवा, महिला, बुजुर्गो से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और म.प्र. की समृद्धि, खुशहाली सुनिश्चित करने सेवा, कल्याण एवं संसाधनों की उपलब्धता के लिए भी प्रावधान किया है। मगर कमलनाथ सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती धन उपलब्धता और योजनाओं प्रभावी क्रियान्वयन की होगी क्योंकि किसी योजना का सटीक क्रियान्वयन ही उसकी सफलता और उसकी प्रमाणिकता का मूल आधार होता है। ये अलग बात है कि म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बेहतर प्लानर प्रबन्धकों में गिने जाते है और उनकी टीम भी प्रभावी है। देखना होगा कि महाराष्ट्र से सटे घने जंगलों के बीच विगत 30-35 वर्षो में छिन्दबाड़ा जैसे सबसे पिछड़े गरीब क्षेत्र को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने वाले कमलनाथ खाली खजाने पर जनाकांक्षा अनुरूप वचन पत्र के साथ म.प्र. के गांव, गली को समृद्ध, खुशहाल कैसे बना पाते है। मगर सबसे बड़ी चुनौती 2019 में कमलनाथ सरकार के सामने गौशाला, गौवंश का संरक्षण, सम्बर्धन की होगी जिसके अक्स से म.प्र. में काॅग्रेस सरकार आकार ले सकी और 15 वर्ष के वनवास पश्चात सत्ता सिंहासन तक पहुंची है।
जय स्वराज
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