म.प्र. में शान्ति, सुरक्षा से खिलबाड़, खतरनाक अहंकार, सतत सत्ता, स्वार्थ में डूबी सत्ताओं का अघोषित अक्षम्य अपराध शर्मनाक

वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 

सत्तायें काल परिस्थिति अनुसार जो भी रही हो। मगर उनका मूल दायित्व अपने नागरिकों की सुरक्षा और शान्ति ही रही है। मगर इस किवदंन्ती सिद्धान्त को व्यक्ति, परिवार, समाज द्वारा चुनी गई सरकारों का कत्र्तव्य विमुख आचरण इसे दुर्दान्त बनाता है। क्योंकि कानून के राज का जो उदाहरण उ.प्र. और काश्मीर, लद्धाख में प्रस्तुत हुआ है म.प्र. को भी यह समझ आना चाहिए। क्योंकि जगह-जगह अनैतिक अतिक्रमण नदी, नाले, तालाब, गौचर, भूमि, सड़क, गली और मन चाहे ढंग से धमाकों सहित डीजे लाउड स्पीकरो की आवाज और मौत के ताबूत बनते मौजूद सड़कों पर दौड़ते बेतहासा वाहन, सरेयाम लूट सेवा कल्याण सुरक्षा के नाम अवैध बसूली की प्रसांगिकता इस बात का परिणाम है कि म.प्र. अब शान्ति, सुरक्षा के नाम अनाथ, तो सेवा कल्याण के नाम बैबा हो चुका है। जिसका अप्रत्याशित दर्द झेल, म.प्र. का गांव, गली, गरीब झेलने पर मजबूर है। विगत 25 वर्षो की सत्ताओं का दंश इस बात का प्रमाण है कि व्यक्ति, परिवार, समाज की आशा-आकांक्षाओं सपने व जीवन की शान्ति सुरक्षा म.प्र. से काफूर हो चुकी है। आज यहीं सबसे बड़ी समझने वाली बात होना चाहिए।
जय स्वराज

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