शूरवीरों को इतिहास, शास्त्रों से सबक लेना चाहिए प्राकृतिक धर्म की रक्षा पुरूषार्थ का कत्र्तव्य और जबावदेही
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब हम प्राकृतिक धर्म की बात करते है तब उसमें प्रकृति, मानव, जीव जगत सभी की सेवा, संरक्षण, कल्याण का भाव छिपा होता है। मगर समृद्ध, खुशहाल स्वस्थ जीवन शैली कत्र्तव्य, उत्तरदायित्व, जबावदेही धर्म की पहचान अपने नैसर्गिक गुण, संस्कृति, संस्कार के रूप में पहचाने जाते है। आज की सियासत में जिस तरह से धर्म युद्ध चल रहा है ऐसे में न्याय के लिये पुरूषार्थ, सामर्थ की प्रमाणिकता ही यह सिद्ध कर सकती है कि सच क्या है और सिद्धता क्या है।
जिस तरह से सियासी दोहन पश्चात हर मर्तवा धर्म का पालन कर आम जीव, जगत सहित मानव सेवा कल्याण में जुटे सिंधिया राजवंश के साथ अन्याय हुआ है शायद अब समय है कि वह मानव धर्म की रक्षा कर सेवा कल्याण के लिये प्रमाणिक प्रमाण दे सके। जिसमें नया कुछ भी नहीं। कौन नहीं जानता कि जनहित की खातिर डीपी मिश्रा की काॅग्रेस सरकार को सबक सिखा कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने उसे सत्ता से बाहर किया था। आज फिर वहीं दोहराव है जिस सेवा कल्याण, सत्याग्रह के चलते म.प्र. के लोगों ने 15 वर्षीय सरकार को विदा कर काॅग्रेस को मौका दिया था वह आज हताश-निराश है। सिंधिया राजवंश का मुखिया जिसने आज कभी मूल्य सिद्धान्तों की राजनीति से समझौता न कर सेवा कल्याण की राजनीति को चुना, जिसे सिंधिया राजवंश पीढ़ी पूर्व से निभाती आ रही है। चाहे उनकी दादी कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पिता कै. श्रीमंत माधवराव सिंधिया उनकी बुआ बसुन्धरा राजे और यशोधरा राजे राजनीति में रही हो या है। आज जब सत्य को नकार सियासत ने उस राजवंश का अनादर किया है ऐसे में म.प्र. की राजनीति में परिणाम अप्रत्याशित हो तो कोई अति संयोक्ति नहीं होना चाहिए। बहरहाल म.प्र. की राजनीति में किसी भी बड़े उलट फेर की संभावनायें मौजूदा सिंधिया राजवंश के मुखिया की मूल सिद्धान्त की राजनीति के चलते कम है। मगर कहते है कि राजनीति का भविष्य किसी ने नहीं देखा राजनैतिक भविष्य में सिर्फ भविष्य की राजनीति का ही आकंलन किया जा सकता है। एक कयास यह भी है कि जिस तरह से पूर्व काॅग्रेस अध्यक्ष अपने ही दल के लोगों से हताश-निराश हो। पार्टी के हार की जबावदेही लेते हुये अध्यक्ष पद से पूर्व में ही इस्तीफा दे चुके है जिसके समर्थन में सिंधिया भी अपना इस्तीफा पार्टी को पद से दे चुके है। ऐसे में काॅग्रेस कार्यकर्ता की श्रेणी में आने के बाद
पूर्व काॅग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सिंधिया परिवार के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनैतिक आधार और भविष्य क्या होगा कहना जल्दबाजी होगी। मगर राजनैतिक संभावनाओं से मुंह मोड़ लिया जाये यह भी भविष्य की संभावनाआंे में संभव नहीं।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब हम प्राकृतिक धर्म की बात करते है तब उसमें प्रकृति, मानव, जीव जगत सभी की सेवा, संरक्षण, कल्याण का भाव छिपा होता है। मगर समृद्ध, खुशहाल स्वस्थ जीवन शैली कत्र्तव्य, उत्तरदायित्व, जबावदेही धर्म की पहचान अपने नैसर्गिक गुण, संस्कृति, संस्कार के रूप में पहचाने जाते है। आज की सियासत में जिस तरह से धर्म युद्ध चल रहा है ऐसे में न्याय के लिये पुरूषार्थ, सामर्थ की प्रमाणिकता ही यह सिद्ध कर सकती है कि सच क्या है और सिद्धता क्या है।जिस तरह से सियासी दोहन पश्चात हर मर्तवा धर्म का पालन कर आम जीव, जगत सहित मानव सेवा कल्याण में जुटे सिंधिया राजवंश के साथ अन्याय हुआ है शायद अब समय है कि वह मानव धर्म की रक्षा कर सेवा कल्याण के लिये प्रमाणिक प्रमाण दे सके। जिसमें नया कुछ भी नहीं। कौन नहीं जानता कि जनहित की खातिर डीपी मिश्रा की काॅग्रेस सरकार को सबक सिखा कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने उसे सत्ता से बाहर किया था। आज फिर वहीं दोहराव है जिस सेवा कल्याण, सत्याग्रह के चलते म.प्र. के लोगों ने 15 वर्षीय सरकार को विदा कर काॅग्रेस को मौका दिया था वह आज हताश-निराश है। सिंधिया राजवंश का मुखिया जिसने आज कभी मूल्य सिद्धान्तों की राजनीति से समझौता न कर सेवा कल्याण की राजनीति को चुना, जिसे सिंधिया राजवंश पीढ़ी पूर्व से निभाती आ रही है। चाहे उनकी दादी कै. राजमाता विजयाराजे सिंधिया, पिता कै. श्रीमंत माधवराव सिंधिया उनकी बुआ बसुन्धरा राजे और यशोधरा राजे राजनीति में रही हो या है। आज जब सत्य को नकार सियासत ने उस राजवंश का अनादर किया है ऐसे में म.प्र. की राजनीति में परिणाम अप्रत्याशित हो तो कोई अति संयोक्ति नहीं होना चाहिए। बहरहाल म.प्र. की राजनीति में किसी भी बड़े उलट फेर की संभावनायें मौजूदा सिंधिया राजवंश के मुखिया की मूल सिद्धान्त की राजनीति के चलते कम है। मगर कहते है कि राजनीति का भविष्य किसी ने नहीं देखा राजनैतिक भविष्य में सिर्फ भविष्य की राजनीति का ही आकंलन किया जा सकता है। एक कयास यह भी है कि जिस तरह से पूर्व काॅग्रेस अध्यक्ष अपने ही दल के लोगों से हताश-निराश हो। पार्टी के हार की जबावदेही लेते हुये अध्यक्ष पद से पूर्व में ही इस्तीफा दे चुके है जिसके समर्थन में सिंधिया भी अपना इस्तीफा पार्टी को पद से दे चुके है। ऐसे में काॅग्रेस कार्यकर्ता की श्रेणी में आने के बाद
पूर्व काॅग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सिंधिया परिवार के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनैतिक आधार और भविष्य क्या होगा कहना जल्दबाजी होगी। मगर राजनैतिक संभावनाओं से मुंह मोड़ लिया जाये यह भी भविष्य की संभावनाआंे में संभव नहीं।
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