क्या बूस्टर डोज से सजेगी हरियाणा-महाराष्ट्र की सियासत ? बाजार को 1.45 लाख करोड की राहत

व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
मजदूर, किसानों को मिले हल्के आर्थिक डोज बाद मेक इन इण्डिया के घोड़े पर सवार रोजगार, कम्पनियों, बैंक, विदेशी देशी निवेश आॅटो रियल स्टेट स्टार्टटप और दीवाली जैसे त्यौहारों की चमक बढ़ाने के साथ महाराष्ट्र हरियाणा जैसे मैनिफेक्चरिंग, कम्पनी बाजार वाले राज्यों के मद्देनजर यूं तो देश भर को लाभ होगा या नुकसान यह अलग बात है कि मगर चुनाव से पूर्व जिस तरह से भाजपा या एनडीए सरकार की बम्फर बूस्टर किसी क्षेत्र को देने की अघोषित तौर पर रही है वह भले ही हताश निराश विपक्ष की समझ से बाहर हो। मगर टुकडे में राष्ट्र-जन कल्याण के सहारे वोट साधने की नीति से फिलहाल इंकार नहीं किया जा सकता। यह सही है कि टेक्स स्लेव कम करने से देशी के साथ विदेशी निवेश भी बडी मात्रा में आ सकता है और रोजगार के साथ खरीददारी मे दिलचस्वी रखने वाले मध्यम व निचले स्तर पर खरीददारी बढ सकती है। जिससे बाजार में स्वतः मांग बढेगी और रूपये का प्रभाव सुन शान पढे बाजार में बढेगा।
मगर यहां समझने वाली बात यह है कि अमेरिका यात्रा पर जाने पूर्व जो बूस्टर बम फूटा है उसकी धमक यूरोपीय ही नहीं अरब कन्ट्री तक गूंजेगी। आर्थिक सम्बन्ध को लेकर जिस तरह के हालात चीन, अमेरिका के बीच है और अमेरिका में चुनाव नजदीक है। उसे देखकर लगता है कि निवेश के क्षेत्र में कुछ बडा काम हो जाये तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। जिससे एक ओर भारत का विदेशी पूंजी का भण्डार बढेगा तो वहीं दूसरी ओर भारतीय कम्पनियां विदेशी कम्पनियों से मिल हीरो होण्डा, मारूती सुजुकी जैसे मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र एडवेन्चर करती है। तो साॅफ्टवेयर सेवा इलेक्ट्राॅनिक, आॅटो मोबाइल क्षेत्र में बडा निवेश हो सकता है। जो भारत की गिरती अर्थव्यवस्था का फौरी इलाज ही मान जायेगा। इसके उल्ट आर्थिक समृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था में तभी आ सकती है। जब सेवा के क्षेत्र में जुगाड तकनीक व निर्माण के क्षेत्र गुणवत्ता सिद्ध करने, छोटे छोटे स्तर पर आर्थिक और बौद्धिक सहयोग सहज मिले तथा प्रतिभाओं को निर्धारित प्रतिशत अंक शिक्षा से दूर स्वच्छंद वातावरण में संसाधन सहित प्रतिभा प्रदर्शन का मौका मिले। अगर औषधि वन संपदा सहित खाद, कलाकृति, पर्यटन, ट्रेब्लिंग, साॅफ्टवेयर क्षेत्र में संरक्षण, सम्बर्धन की शुरूआत होती है। तो परिणाम अप्रत्याशित हो सकते और हमारी अर्थव्यवस्था सातवें आसमान पर। 
जय स्वराज

Comments

Popular posts from this blog

खण्ड खण्ड असतित्व का अखण्ड आधार

संविधान से विमुख सत्तायें, स्वराज में बड़ी बाधा सत्ताओं का सर्वोच्च समर्पण व आस्था अहम: व्ही.एस.भुल्ले

श्राफ भोगता समृद्ध भूभाग गौ-पालन सिर्फ आध्यात्म नहीं बल्कि मानव जीवन से जुडा सिद्धान्तः व्यवहारिक विज्ञान है अमृतदायिनी के निस्वार्थ, निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन, त्याग तपस्या का तिरस्कार, अपमान पडा भारी जघन्य अन्याय, अत्याचार का दंश भोगती भ्रमित मानव सभ्यता