गौवंश की सेवा को पहुंचे, प्रधानमंत्री स्वराज ने माना आभार
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अपने ही वंशजों के भूभाग भारतवर्ष में अपनों की ही अज्ञानता बस, विगत 5 दशक से हो रही गौवंश की उपेक्षा, अन्याय, अत्याचार पर ध्यान आक्रसित करने स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने गौमाता को उनका मान, सम्मान, हक दिलाने एक वैचारिक अभियान छेड़ रखा है। पहली सफलता तब मिली जब गत वर्ष म.प्र. विधानसभा चुनावों मंे गौवंश संरक्षण सम्बर्धन का मुद्दा बना जिसे म.प्र. के वर्तमान मुख्यमंत्री ने अपने वचन पत्र में शामिल कर म.प्र. में सरकार बनते ही 1000 के लगभग गौशाला समूचे म.प्र. में खोलने का निर्णय लिया। जबकि चुनावों में हर पंचायत में गौशाला की बात कही गई थी। स्वयं के जल, जंगल, जमीन और स्वयं के मान, सम्मान से वंचित गौवंश पीढ़ी दर पीढ़ी मानव, समाज की सेवा कर त्याग तपस्या के बावजूद अपने हक से बेदखल सडकों पर मरने पर मजबूर है। हाल ही में स्वराज विचार के माध्यम से गौवंश संरक्षण सुनिश्चित करने स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने ब्रजधाम की यात्रा की जहां बीमार, घायल, अनाथ गौवंश का हाल देख व्यथित तो हुये मगर उनकी सेवा में जुटे लोगों को देख उन्हें आत्म सन्तोष भी मिला। मगर अब जबकि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने अपनी मथुरा यात्रा के दौरान गौमाता की पूजा कर आर्शीवाद लिया है। ऐसे में गौवंश कल्याण की उम्मीद तो की जा सकती है। गौवंश का हाल जानने व गौवंश की भारतीय अर्थव्यवस्था में अहमीयत रेखांकित करते हुये कामधेनु की सार्थकता को सिद्ध किया जो सुखद है। जिसके लिये स्वराज मुख्य संयोजक का मानना है कि गौवंश संरक्षण, गौसेवा सेवा से बढ़कर भारतवर्ष मे समर्थ, समृद्ध और समृद्धि का और कोई मार्ग हो नहीं सकता तथा प्रधानमंत्री जी की गौवंश के प्रति सेवा की कृतज्ञता पर स्वराज संयोजक ने उनका आभार व्यक्त किया है तथा म.प्र. के मुख्यमंत्री का भी आभार माना है। मगर म.प्र. ही नहीं समूचे भारतवर्ष में मानव की कृतज्ञता तब सिद्ध होगी जब वह ज्ञान के सानिध्य में गौवंश के प्रति अपनी कृतज्ञता सिद्ध करने में कामयाब हो।
जय स्वराज
अपने ही वंशजों के भूभाग भारतवर्ष में अपनों की ही अज्ञानता बस, विगत 5 दशक से हो रही गौवंश की उपेक्षा, अन्याय, अत्याचार पर ध्यान आक्रसित करने स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने गौमाता को उनका मान, सम्मान, हक दिलाने एक वैचारिक अभियान छेड़ रखा है। पहली सफलता तब मिली जब गत वर्ष म.प्र. विधानसभा चुनावों मंे गौवंश संरक्षण सम्बर्धन का मुद्दा बना जिसे म.प्र. के वर्तमान मुख्यमंत्री ने अपने वचन पत्र में शामिल कर म.प्र. में सरकार बनते ही 1000 के लगभग गौशाला समूचे म.प्र. में खोलने का निर्णय लिया। जबकि चुनावों में हर पंचायत में गौशाला की बात कही गई थी। स्वयं के जल, जंगल, जमीन और स्वयं के मान, सम्मान से वंचित गौवंश पीढ़ी दर पीढ़ी मानव, समाज की सेवा कर त्याग तपस्या के बावजूद अपने हक से बेदखल सडकों पर मरने पर मजबूर है। हाल ही में स्वराज विचार के माध्यम से गौवंश संरक्षण सुनिश्चित करने स्वराज के मुख्य संयोजक व्ही.एस.भुल्ले ने ब्रजधाम की यात्रा की जहां बीमार, घायल, अनाथ गौवंश का हाल देख व्यथित तो हुये मगर उनकी सेवा में जुटे लोगों को देख उन्हें आत्म सन्तोष भी मिला। मगर अब जबकि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने अपनी मथुरा यात्रा के दौरान गौमाता की पूजा कर आर्शीवाद लिया है। ऐसे में गौवंश कल्याण की उम्मीद तो की जा सकती है। गौवंश का हाल जानने व गौवंश की भारतीय अर्थव्यवस्था में अहमीयत रेखांकित करते हुये कामधेनु की सार्थकता को सिद्ध किया जो सुखद है। जिसके लिये स्वराज मुख्य संयोजक का मानना है कि गौवंश संरक्षण, गौसेवा सेवा से बढ़कर भारतवर्ष मे समर्थ, समृद्ध और समृद्धि का और कोई मार्ग हो नहीं सकता तथा प्रधानमंत्री जी की गौवंश के प्रति सेवा की कृतज्ञता पर स्वराज संयोजक ने उनका आभार व्यक्त किया है तथा म.प्र. के मुख्यमंत्री का भी आभार माना है। मगर म.प्र. ही नहीं समूचे भारतवर्ष में मानव की कृतज्ञता तब सिद्ध होगी जब वह ज्ञान के सानिध्य में गौवंश के प्रति अपनी कृतज्ञता सिद्ध करने में कामयाब हो।
जय स्वराज

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