बैवजह धमाके बैलगाम डीजे और सोशल मीडिया पर फैक न्यूज पुलिस की मजबूरी या अलाली के चलते दुष्वार हुआ शांत जीवन
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जिस तरह की अराजकता धर्म, संस्कृति, अधिकारों की आड़ में पुलिस की बैवसी अर्कमण्यता के चलते आज गांव, गली, मौहल्ला, नगर मे पैर पसार रही है उससे अब आम शांत प्रिय जीवन, खासकर मानव का जीव, जंतु इत्यादि का जीवन संकट में नजर आ रहा है। अगर यथार्थ पर नजर डाले तो अपना दर्द दुखी इन्सान, जबावदेह लोगों को भी उनकी अर्कमण्यता, अलाली के चलते वयां नहीं कर सकता। कारण शिकायतकर्ता की समस्या का निदान करने के बजाये समस्या बताने वाले के ही गले निदान का फारमूला लगा कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल प्रस्तुत करना है। जो वोट और सत्ता के लिये अन्धे संगठन, सत्ताओं को समझने वाली बात होना चाहिए। अगर यहीं हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब अराजकता किसी भी सभ्य समाज में सर चढ़कर बोले और कत्र्तव्यनिष्ठ तमाशा देख, एक न एक दिन उसी समस्या सागर में सराबोर नजर आये तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।
जिस तरह की अराजकता धर्म, संस्कृति, अधिकारों की आड़ में पुलिस की बैवसी अर्कमण्यता के चलते आज गांव, गली, मौहल्ला, नगर मे पैर पसार रही है उससे अब आम शांत प्रिय जीवन, खासकर मानव का जीव, जंतु इत्यादि का जीवन संकट में नजर आ रहा है। अगर यथार्थ पर नजर डाले तो अपना दर्द दुखी इन्सान, जबावदेह लोगों को भी उनकी अर्कमण्यता, अलाली के चलते वयां नहीं कर सकता। कारण शिकायतकर्ता की समस्या का निदान करने के बजाये समस्या बताने वाले के ही गले निदान का फारमूला लगा कत्र्तव्य निर्वहन की मिशाल प्रस्तुत करना है। जो वोट और सत्ता के लिये अन्धे संगठन, सत्ताओं को समझने वाली बात होना चाहिए। अगर यहीं हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब अराजकता किसी भी सभ्य समाज में सर चढ़कर बोले और कत्र्तव्यनिष्ठ तमाशा देख, एक न एक दिन उसी समस्या सागर में सराबोर नजर आये तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।
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