वोट चोट से सत्ता समृद्धि की सियासत
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता के लिये सबसे अहम वोट होता है और अगर वोट पर ही सत्ता समृद्धि के नाम सटीक चोट करने में महारथ हासिल करले तो सत्ता की समृद्धि तो बढती ही है। अब्बल सतत सत्ता का भी मार्ग प्रस्त होना स्वभाविक होता है। भले ही वोट देने वालो की जमात समृद्ध खुशहाल जीवन का सपना सजा पथराई आंखों से अभाव ग्रस्त विरासत अपनी पीढी को सौंप विदा ले जाये, क्या फर्क पडता है सत्ता, सभा, परिषदों को कहते है कि किसी को फर्क पढे न पढे। मगर संस्थागत ढांचे का जो सर्वनाश होता है। उसका भविष्य बडा ही वीभत्स होता है। शायद आज हम समृद्ध विरासत के उत्तराधिकारी उसी दौर में हो। मगर कहते परिवर्तन प्रकृति का नियम है। अगर लीग से हट हम कुछ कर पाये अपनी प्रतिभाओं, विधा, विद्ववानों को सहज संसाधन जुटा अवसर मुहैया करा पाये तो कोई कारण नहीं जो हम वोट चोट की नीति छोड यकीनन अपनी कौम और भारतवर्ष की सुन्दर समृद्ध कायनात को न बचा पाये।
कहते है लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता के लिये सबसे अहम वोट होता है और अगर वोट पर ही सत्ता समृद्धि के नाम सटीक चोट करने में महारथ हासिल करले तो सत्ता की समृद्धि तो बढती ही है। अब्बल सतत सत्ता का भी मार्ग प्रस्त होना स्वभाविक होता है। भले ही वोट देने वालो की जमात समृद्ध खुशहाल जीवन का सपना सजा पथराई आंखों से अभाव ग्रस्त विरासत अपनी पीढी को सौंप विदा ले जाये, क्या फर्क पडता है सत्ता, सभा, परिषदों को कहते है कि किसी को फर्क पढे न पढे। मगर संस्थागत ढांचे का जो सर्वनाश होता है। उसका भविष्य बडा ही वीभत्स होता है। शायद आज हम समृद्ध विरासत के उत्तराधिकारी उसी दौर में हो। मगर कहते परिवर्तन प्रकृति का नियम है। अगर लीग से हट हम कुछ कर पाये अपनी प्रतिभाओं, विधा, विद्ववानों को सहज संसाधन जुटा अवसर मुहैया करा पाये तो कोई कारण नहीं जो हम वोट चोट की नीति छोड यकीनन अपनी कौम और भारतवर्ष की सुन्दर समृद्ध कायनात को न बचा पाये।

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