म.प्र. नये दल की संभावनायें प्रबल प्रमुख राजनैतिक के चाल, चरित्र, नीति परिणामों से सांसत में लोग
वीरेन्द्र शर्मा
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अगर आजादी के 70 वर्ष की सत्ता सियासत के परिणामों पर नजर डाले तो कुछ क्षेत्र में अनवरत विकास हुआ है। खासकर इन्प्रास्टक्चर निर्माण क्षेत्र में। मगर जिन क्षेत्रों में विकास होना था उन क्षेत्रों में प्रत्याशित विकास नहीं हो सका जिसका दंश आज समूचा म.प्र. से झेलने पर मजबूर है। मगर विगत 25 वर्षो में लोकतांत्रित संस्थाओं में लोकतांत्रिक संस्थाओं शिक्षा, स्वास्थ, पेयजल, सुरक्षा, सेवा क्षेत्र का जो सत्यानाश हुआ है वह किसी से छिपा नही। कारण शिक्षित, सेवाभावी समझदार स्वाभिमानी लोगों का सियासत में मार्ग अवरूद्ध हो बंद हो जाना। जिसके चलते अब न तो प्राथमिक, माध्यमिक हायर सैंकण्डरी सहित उच्च शिक्षा के क्षेत्र से लीडरशिप के रास्तों का बंद हो जाना। तो दूसरी ओर बाहुबल, धन बल सहित चाटूकारी, चापलूसी का शिकार हो सियासत का सत्ता भोगी, अर्थभोगी हो जाना रहा। विगत 25 वर्षो में सियासत सत्ता की दुनिया में जो एक से बढ़कर एक कीर्तिमान स्थापित हुये उसने भले ही युवा पीढ़ी के आत्म सम्मान को जाग्रत न होने दिया हो और अति स्वार्थी नागरिकों का आत्म सम्मान निस्तानाबूत हो चुका हो। मगर मूड़धन्य, बुद्धिजीवीयों को अब भी उम्मीद है किसी नये दल की, देखना होगा कि लोगों की मंशा म.प्र. की सियासत में पैर जमा आखिर कब कामयाब हो पाती है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
अगर आजादी के 70 वर्ष की सत्ता सियासत के परिणामों पर नजर डाले तो कुछ क्षेत्र में अनवरत विकास हुआ है। खासकर इन्प्रास्टक्चर निर्माण क्षेत्र में। मगर जिन क्षेत्रों में विकास होना था उन क्षेत्रों में प्रत्याशित विकास नहीं हो सका जिसका दंश आज समूचा म.प्र. से झेलने पर मजबूर है। मगर विगत 25 वर्षो में लोकतांत्रित संस्थाओं में लोकतांत्रिक संस्थाओं शिक्षा, स्वास्थ, पेयजल, सुरक्षा, सेवा क्षेत्र का जो सत्यानाश हुआ है वह किसी से छिपा नही। कारण शिक्षित, सेवाभावी समझदार स्वाभिमानी लोगों का सियासत में मार्ग अवरूद्ध हो बंद हो जाना। जिसके चलते अब न तो प्राथमिक, माध्यमिक हायर सैंकण्डरी सहित उच्च शिक्षा के क्षेत्र से लीडरशिप के रास्तों का बंद हो जाना। तो दूसरी ओर बाहुबल, धन बल सहित चाटूकारी, चापलूसी का शिकार हो सियासत का सत्ता भोगी, अर्थभोगी हो जाना रहा। विगत 25 वर्षो में सियासत सत्ता की दुनिया में जो एक से बढ़कर एक कीर्तिमान स्थापित हुये उसने भले ही युवा पीढ़ी के आत्म सम्मान को जाग्रत न होने दिया हो और अति स्वार्थी नागरिकों का आत्म सम्मान निस्तानाबूत हो चुका हो। मगर मूड़धन्य, बुद्धिजीवीयों को अब भी उम्मीद है किसी नये दल की, देखना होगा कि लोगों की मंशा म.प्र. की सियासत में पैर जमा आखिर कब कामयाब हो पाती है।
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