देशी विदेशी, स्थानीय निवेश, काॅरपोरेट सेक्टर के साथ, स्थानीय इनोवेशन जुगाड़, तकनीक, प्रशिक्षण, अवसर, संसाधन अहम, सत्ता शासन का निवेश सृजन परिणाम और पुरूषार्थ, प्रदर्शन में हो, आर्थिक समृद्धि स्वतः सिद्ध होगी
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब तक ऊर्जा दोहन का मार्ग हम सटीक तौर पर निर्धारित नहीं कर लेते तब तक हमारे तथाकथित सार्थक प्रयास अक्षम, असफल ही साबित होते रहेेंगे। यह सही है कि किसी भी समृद्धि में शक्ति का अपना एक अहम योगदान होता है जो सृजित जीवन सदभाव, सुरक्षा का भाव पैदा करता है। मगर कहते है कि शक्तिशाली होने के लिये स्वस्थ, समृद्ध, जीवन और संसाधन अहम होते है। जिसे सशक्त समृद्ध सहज संसाधनों की आवश्यकता होती है। जो सहज समृद्ध जीवन के निर्माण में सहायक होते है। जब तक हम प्रतिभा प्रदर्शन के ंसाधन और संसाधन युक्त वातावरण निर्माण नहीं कर लेते तथा सत्ता शासकों में अपने देश प्रदेश, जिला, जनपद, गांव, गली में आभावहीन प्रतिभा, विधा, विद्ववानों के प्रति न्याय कत्र्तव्यनिष्ठा का भाव नहीं आता तथा तब तक सत्तायें गिरोहबंद संस्कृति से दूर सर्वकल्याण के भाव के साथ स्थापित र्दुव्यवस्था को दूर नहीं कर लेती जब तक समृद्धि का मार्ग अधूरा ही रहेगा। समृद्धि शक्ति, खुशहाल समृद्ध जीवन के दो पहलू है। जिनके आधार पर कोई भी समृद्ध विरासत ही नहीं वर्तमान का भी निर्माण होता है। प्राकृतिक सच से दूर खींचे जाने वाला समृद्धि का खांका उस शब्दावली के समान होता है जो न तो पढने, न ही समझने योग्य होता है और न ही अपनी उपायदेयता सिद्ध कर पाता है। इसलिये आर्थिक समृद्धि में समझबूझ नैसर्गिक गुण व प्राकृतिक सिद्धान्त अहम होते है। अगर आज की अर्थव्यवस्था एक बडी चुनौती और निर्धारित लक्ष्य चैलेंज है। तो ऐेसे में सत्ता का धर्म है कि वह गुणवत्तापूर्ण निर्माण और जुगाड तकनीक में प्रतिभाआंे का प्रोत्साहन तथा हमारी पारम्परिक संपदा ही हमें शक्तिशाली बना एक समृद्ध अर्थ व्यवस्था बना सकती है।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
जब तक ऊर्जा दोहन का मार्ग हम सटीक तौर पर निर्धारित नहीं कर लेते तब तक हमारे तथाकथित सार्थक प्रयास अक्षम, असफल ही साबित होते रहेेंगे। यह सही है कि किसी भी समृद्धि में शक्ति का अपना एक अहम योगदान होता है जो सृजित जीवन सदभाव, सुरक्षा का भाव पैदा करता है। मगर कहते है कि शक्तिशाली होने के लिये स्वस्थ, समृद्ध, जीवन और संसाधन अहम होते है। जिसे सशक्त समृद्ध सहज संसाधनों की आवश्यकता होती है। जो सहज समृद्ध जीवन के निर्माण में सहायक होते है। जब तक हम प्रतिभा प्रदर्शन के ंसाधन और संसाधन युक्त वातावरण निर्माण नहीं कर लेते तथा सत्ता शासकों में अपने देश प्रदेश, जिला, जनपद, गांव, गली में आभावहीन प्रतिभा, विधा, विद्ववानों के प्रति न्याय कत्र्तव्यनिष्ठा का भाव नहीं आता तथा तब तक सत्तायें गिरोहबंद संस्कृति से दूर सर्वकल्याण के भाव के साथ स्थापित र्दुव्यवस्था को दूर नहीं कर लेती जब तक समृद्धि का मार्ग अधूरा ही रहेगा। समृद्धि शक्ति, खुशहाल समृद्ध जीवन के दो पहलू है। जिनके आधार पर कोई भी समृद्ध विरासत ही नहीं वर्तमान का भी निर्माण होता है। प्राकृतिक सच से दूर खींचे जाने वाला समृद्धि का खांका उस शब्दावली के समान होता है जो न तो पढने, न ही समझने योग्य होता है और न ही अपनी उपायदेयता सिद्ध कर पाता है। इसलिये आर्थिक समृद्धि में समझबूझ नैसर्गिक गुण व प्राकृतिक सिद्धान्त अहम होते है। अगर आज की अर्थव्यवस्था एक बडी चुनौती और निर्धारित लक्ष्य चैलेंज है। तो ऐेसे में सत्ता का धर्म है कि वह गुणवत्तापूर्ण निर्माण और जुगाड तकनीक में प्रतिभाआंे का प्रोत्साहन तथा हमारी पारम्परिक संपदा ही हमें शक्तिशाली बना एक समृद्ध अर्थ व्यवस्था बना सकती है।
Comments
Post a Comment