विश्व शान्ति सौहार्द के लिए चल निकले शान्तिदूत 2 अक्टूबर 2020 को जैनेवा पहुंचेगी यात्रा अहिंसा के प्रशिक्षण केन्द्र बनायेंगे, अहिंसा से बडा विश्व में कोई अस्त्र नहीं- राजगोपाल पी.व्ही.

विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
2 अक्टूबर 2019 से शुरू होकर 2 अक्टूबर 2020 में जैनेवा पहुंचने वाली शान्तिदूतों की यात्रा 10 देशों का सफर तय कर शान्ति सौहार्द और अहिंसा का संदेश देगी। यात्रा का नेतृत्व कर रहे एकता परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक राजगोपाल पी.व्ही ने विलेज टाइम्स संपादक वीरेन्द्र शर्मा से अनौपचारिक चर्चा में कहा कि विश्व में अहिंसा से बडा और कोई दूसरा अस्त्र नहीं और महात्मा गांधी इसकी जीती जागती मिशाल है। उनका संदेश अपने आप में सम्पूर्ण है उन्होंने कहा कि हम सौभाग्यशाली है जो हमारे भूभाग पर ऐसे अदभुत व्यक्तित्व और कार्यशैली के धनी महात्मा गांधी जी ने जन्म लिया और उसे अपनी कर्म स्थली भी बनाया। विश्व शान्ति के लिए गांधी के संदेश से बडा आज कोई दूसरा संदेश नहीं हो सकता। 
आज कुछ लोग है जो गांधी विचार को भुलाना चाहते है मगर हमारी केन्द्र की और म.प्र. की सरकार ने गांधी जी की जयन्ती के 150वीं वर्ष पूर्ण होने पर जिस तरह से उत्साहपूर्ण मनाने का निर्णय लिया है और गांधी के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का जो कार्य किया है उस पर हर नागरिक को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह चम्बल घाटी को अहिंसा के प्रशिक्षण का केन्द्र बनाना चाहते है। उनका मानना है कि शस्त्रों से कभी शान्ति नहीं हो सकती और न ही लोगों का जीवन खुशहाल हो सकता है। आज के समय में समूचे विश्व में सिर्फ एक ही विकल्प है और वह है गांधी जी का संदेश और शान्ति के लिए सार्थक प्रयास लगभग 10 देशों के प्रतिनिधियों के साथ लगभग 11 हजार किलोमीटर के पैदल मार्च पर निकले राजगोपाल पी.व्ही. जहां भी अपनी यात्रा का पडाव रखते है वहां सायंकाल बुद्ध महावीर और गांधी के संदेश तथा विनोवा जी के उदाहरण तथा प्रार्थना सभा करने से नहीं चूकते यह उनके दिनचर्या का भाग है। तो वहीं सुबह यात्रा होने से पूर्व विधा, विद्ववान, बुद्धिजीवियों से चर्चा तथा स्कूली बच्चों से बतियाना नहीं भूलते। अन्त में जब राजगोपाल से पूछा गया कि जो चंबल घाटी कभी दस्यु, बागी, डकैतों के नाम से थर्राती थी आखिर ऐसे भूभाग पर अहिंसा का संदेश कैसे सार्थक हो सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि विनोवा जी की 15 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा और हजारों हैक्टेयर भूमि का दान चंबल घाटी में होना इस बात का प्रमाण है कि इस क्षेत्र का स्वाभिमान और इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों का समर्पण शुरू से ही अद्वितीय रहा है। बरना निहत्थे लोगों के सामने हथियार बंद लोगों का समर्पण चंबल घाटी में नहीं हो पाता।

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