स्वराज का असर अनाथों की सेवा को लेकर सख्त हुये नाथ मं.प्र. मुख्यमंत्री ने की गौ-सम्बर्धन संरक्षण की समीक्षा

धर्मेन्द्र सिंह
विलेज टाइम्स समाचार सेवा। 
जैसा कि विदित है कि विगत एक दशक से कामधेनु वर्ग की सृजन, समृद्धि, खुशहाली में उपायदेयता को लेकर संघर्षरत व्ही.एस.भुल्ले द्वारा एक वैचारिक जागरण का अभियान स्वयं के मौजूद संसाधनों के बीच छेड रखा है। जिसके तहत कामधेनु वर्ग के मान-सम्मान और उनके स्वाभिमान की रक्षा हेतु गोष्ठियां, चर्चा तथा जल संरक्षण सहित गौ-सम्बर्धन के क्षेत्र में वैचारिक चर्चा छेड रखी है। उसी का परिणाम है कि जिन स्कूलों में कभी समाज, सत्ता, सियासत के लोग जाने से खिचखिचाते थे आज पूरे स्वाभिमान के साथ लोग दशा दिशा देने विद्यालय, महाविद्यालयों का रूख कर रहे है। जल संरक्षण को लेकर भी आज देश में चर्चा सरगर्म है। 
जिस तरह से चुनाव से पूर्व गौ-सम्बर्धन, संरक्षण का वचन म.प्र. के मुख्यमंत्री ने दिया था उस क्रम में म.प्र. में लगभग एक हजार गौशालाओं को खोलने का लक्ष्य निर्धारित हुआ है। मंदगति से चलता गौशालाआंे के निर्माण पर स्वराज के मुख्य संयोजक ने सार्वजनिक तौर पर जब सरकार को चेताया तब जाकर हालिया तौर पर म.प्र. के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बेजुबान अनाथ गौवंश की सेवा के लिये नाथ बने कमलनाथ ने आला अफसरों की बैठक कर मंदगति से चल रहे कार्य पर नाराजगी व्यक्त की तथा जवाबदेह लोगों को आडे हाथों लेते हुये कहा कि अगर कार्य की गति ऐसी रही तो अगले वर्ष तक 3 हजार गौशाला निर्माण लक्ष्य कैसे पूरा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ-संरक्षण सम्बर्धन कार्य में पैसे की कमी नहीं आने दी जायेगी। अगर कोई समस्या है तो उसमें उन्हें सीधे अवगत कराया जाये। जिससे मौजूद समस्या का समाधान तत्काल हो सके। 
जय स्वराज

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