सियासत में हार जीत कोई, अन्तिम सत्य नहीं निष्ठापूर्ण कत्र्तव्य निर्वहन सबसे बडी जीत
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है स्वार्थवत सियासत में सजगता का अभाव और स्वार्थवत महत्वकांक्षी सिपहसालार सैनिकों का बडा समूह होने के बावजूद कभी कभी राजा हार जाता है। लेकिन सत्ता, सियासत में सजगता संवाद सटीक सूचना व समर्पित सलाहकारों का बडा योगदान होता है। जब सियासत की इस सच्चाई से अनभिज्ञ कोई सद पुरूष प्रत्याशित परिणामों के विपरीत स्वयं को पाता तो इसमें संदेह नहीं होना चाहिए कि हालिया तौर पर नहीं कई वर्षो का यह अप्रत्याशित परिणाम है। अन्तर निहित अपारदर्शी कारण कई हो सकते है। खासकर जब सत्ता सिंहासन का मार्ग जनतांत्रिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होकर गुजरता हो। मगर उन जनाकांक्षाओं का क्या जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सदपुरूष के साथ खडी रही। जो आज स्वयं को ठगा सा मेहसूस करती होगीं। बहरहाल जाने अनजाने ही सही, जिस कुरूप सियासत का चेहरा पथराई आंखों में नजर आता है। वह बडा ही दर्दनाक है। ये अलग बात है कि कुछ क्षण के लिये सच ओझल हुआ है। मगर जल्द ही किसी चमकदार चेहरे के रूप में बुझती आशा-आकांक्षाओं के बीच लोगों के सामने हो तो किसी कोई अतिसंयोक्ति नहीं होनी चाहिए।
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है स्वार्थवत सियासत में सजगता का अभाव और स्वार्थवत महत्वकांक्षी सिपहसालार सैनिकों का बडा समूह होने के बावजूद कभी कभी राजा हार जाता है। लेकिन सत्ता, सियासत में सजगता संवाद सटीक सूचना व समर्पित सलाहकारों का बडा योगदान होता है। जब सियासत की इस सच्चाई से अनभिज्ञ कोई सद पुरूष प्रत्याशित परिणामों के विपरीत स्वयं को पाता तो इसमें संदेह नहीं होना चाहिए कि हालिया तौर पर नहीं कई वर्षो का यह अप्रत्याशित परिणाम है। अन्तर निहित अपारदर्शी कारण कई हो सकते है। खासकर जब सत्ता सिंहासन का मार्ग जनतांत्रिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होकर गुजरता हो। मगर उन जनाकांक्षाओं का क्या जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सदपुरूष के साथ खडी रही। जो आज स्वयं को ठगा सा मेहसूस करती होगीं। बहरहाल जाने अनजाने ही सही, जिस कुरूप सियासत का चेहरा पथराई आंखों में नजर आता है। वह बडा ही दर्दनाक है। ये अलग बात है कि कुछ क्षण के लिये सच ओझल हुआ है। मगर जल्द ही किसी चमकदार चेहरे के रूप में बुझती आशा-आकांक्षाओं के बीच लोगों के सामने हो तो किसी कोई अतिसंयोक्ति नहीं होनी चाहिए।
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