दीपोत्सव पर अरमानों का दीवाला...............तीरंदाज ?

व्ही.एस.भुल्ले
भैया- बाबा के राज्य में साढे 5 लाख से अधिक दीप प्रज्जलन का विश्व रिकार्ड बन रहा है तो वहीं हरियाणा सहित महाराष्ट्र राज्य में नई सरकारों का दीपोत्सव शुरू हो भाव, मोल भाव के सहारे सत्ता में भागीदार का फाॅरमूला फिक्स हो रहा है। इस बीच महालक्ष्मी पूजन की खरीददारी के बीच नये वस्त्र के नाम तने (लंगोट) खरीद रिया शै, कै तने बावला शै। जिस त्यौहार की तैयारी महीनों पूर्व और वस्त्रों के धमाकेदार व्यापार के बीच होती है और तने एक वर्ष के त्यौहार पर (लंगोट) खरीद रिया शै, कै वाक्य में ही दीपोत्सव के पावन पर्व पर थारा दीवाला निकल गिया शै।
भैये- दीवाला निकले थारा मने तो दीपोत्सव पर अपनी महान विरासत, सभ्यता, संस्कृति को संरक्षित करने की कोशिश कर अपने व अपनो का भविष्य सुरक्षित कर रहा हूं। कै थारे को मालूम कोणी कि (लंगोट) की महिमा ही आज हमारी महान समृद्ध, सुसंस्कृत सभ्यता की तीसरी उपलब्ध विरासत है और म्हारे को तो लागे कि (लंगोट) ही अब भविष्य का वह सम्पूर्ण वस्त्र और अस्त्र साबित होने वाला है। जिसका नाम भी एक न एक दिन गिनीज बुक में दर्ज होगा। क्योंकि अब (लंगोट) ही हमारी महान विरासत का अचूक अस्त्र और वस्त्र बनने वाला है जो हमारे चरित्र, इज्जत को सुरक्षित रख इस अर्थ युग में हमारी विरासत का सम्मानित प्रतीक बनने वाला है। काडू बोल्या कि आज नहीं तो कल (लंगोट) का ही परचम लहराने वाला है और उसी के सहारे अब समस्त मानव, जीव, जगत का जीवन खुशहाल, समृद्ध होने वाला है बोल भैया कैसी रही। 
भैया- कै तने बावला शै, जो म्हारे महान दीपोत्सव पर अर्र-बर्र बोल रिया शै। म्हारे प्रभु राम के आगमन दिवस को लगता है तने हल्के में ले रिया शै। 
भैये- सच सुनना चाहे तो सुन थारे जैसे ही दरबारी कभी उस जमाने में रहे होगंे जो कभी रामराज तो कभी गौवंश, गौ-सरंक्षण, ग्राम स्वराज के साक्षी रहे होगें। पीडित, वंचित, गांव, गरीब, अंतिम पंक्ति में खडे लोगों को वेभाव सपने बेचते रहे होंगे। कै थारे को मालूम कोणी कि विगत वर्षो में कई सत्तायें, सेवा, कल्याण के नाम आईं और गईं। मगर सृजन, सेवा, कल्याण का प्रमाणिक आधार आज तक सिद्ध नहीं कर सकी। अब तो बात सेवा, कल्याण के नाम समृद्धि, खुशहाली से इतर लंगोट तक जा पहुंची है। मगर मने न लागे कि कोई बड़ा चमत्कार होने वाला है। मने तो बोल्यू (लंगोट) ही सही मने तो अपने प्रभु राम के आगमन का दीपोत्सव बडे ही धूमधाम से मनाऊंगा और गर म्हारा बस चला तो समृद्ध, खुशहाल भारतवर्ष ही नहीं समस्त मानव, जीव-जगत का जीवन सृजन में सृष्टि के सहारे संकल्पित और कृतज्ञ बनाऊंगा।
जय स्वराज  

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