श्रीमानों आप ही कुछ करो हमारे माननीय तो वोट, सत्ता नीति के आगे बैवस और लाचार है स्वराज का खुला पत्र
व्ही.एस.भुल्ले
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है लोकतंत्र की सबसे बडी ताकतवर संस्था कार्यपालिका में संविधान प्रदत्त शक्तियों के चलते आप शासन की शक्ति का अहम भाग है। जिसे सीधे तौर पर संवैधानिक संरक्षण व लोक-जन राज्य, राष्ट्र, नगर, गांव, वार्ड की सेवा कल्याण विकास में विधि सम्वत क्रियान्वयन के अधिकार प्राप्त है।
लोकतंत्र में आमजन के वोट के बल 5 वर्ष के लिए सेवा कल्याण को चुने जाने के चलते वोट व सत्ता की खातिर माननीयों की बैवसी मजबूरी तो जान पडती है। मगर श्रीमानों आपको तो विधि सम्वत शासकीय सेवा में आने के बाद 60 वर्ष की उम्र तक सेवा, विकास, कल्याण का बगैर किसी बैवसी लाचारी के संवैधानिक अवसर प्राप्त है। फिर स्वस्थ सोच, सेवा, कल्याण से हम गांव, गली के लोग बैवस, नैसर्गिक सुविधाओं से मेहरूम क्यों है। आखिर आप लोग भी तो हमारे ही बीच से तो है और शासकीय सेवा से निवृत होने के पश्चात आपको भी तो हमारे ही बीच तो रहना है तथा आपके द्वारा सम्र्बधित संरक्षित मार्गदर्शित व्यवस्था में आप और हमको इसी लोकतंत्र में किसी न किसी नगर, शहर, गांव, गली में रहना है।
धन्यवाद के पात्र है हमारे म.प्र के वरिष्ठ मुख्य श्रीमान जिन्होंने मिलावटखोरो पर टूट पडने अपने मातहतों को संदेश दिया है।
श्रीमान सेवा, कल्याण व अनियंत्रित विकास से तो हम 3 दशक से जैसे-तैसे जिन्दा रह इस उम्मीद में जीवन निर्वहन के संघर्षपूर्ण माहौल में संघर्षरत है कि हमारे समृद्ध, खुशहाल जीवन का सपना कभी तो पूर्ण होगा और स्वस्थ सृजनपूर्ण शिक्षा तथा स्वस्थ जीवन के साथ रोजगार न सही तो अपने पुस्तैनी काम धंधे या खेती किसानी का स्वच्छंद मौका मिलेगा। मगर श्रीमानों अब तो हमारी नस्ल ही शुद्ध खादान्न पौष्टिक आहार के आभाव में जीवन के लिए संकटग्रस्त है। दूध, दही, छांछ के देश में असली दूध, दही, मक्खन का संकट है। भाई लोग है कि रातों रात अकूत दौलत कमा स्वर्ग जमीन पर लाना चाहते है और स्वयं के साथ अपनों का भविष्य कई पीढ़ियों तक स्वर्गमयी बनाना चाहते है। ऐसे में उम्मीद सिर्फ और सिर्फ श्रीमानों आपसे से ही है। आप पढे लिखे ऊर्जावान, सामर्थवान और अकल्पनीय पुरूषार्थ के धनी है। मानवीय सेवा कल्याण, विकास की सोच के मामले में आप क्रिमीलियर माने जाते है। क्योंकि माननीय तो वोट और सतत सत्ता नीत के आगे बैवस मजबूर है। बडी उम्मीद है श्रीमानों इस समृद्ध, खुशहाल विरासत के उत्तराधिकारी गांव, गली, गरीब, मायूस, बैवस लोगों को आपसे।
मुझे विश्वास है कि आप हमें निराश नहींे करेंगे। क्योंकि आप हमारे अपने है। हमारे बीच से ही तो आप है। हम एक है। हमारे बीच पद, प्रतिष्ठा, अर्थ, गौरव, वैभव का अन्तर हो सकता है। मगर आखिर हम सभी इन्सान ही तो है और आज इन्सानियत का तकाजा है कि हम और आप मिलकर अवश्य कुछ ऐसा करे जिससे हम ही नहीं हमारी आने वाली पीढ़िया हम पर गर्व और गौरव मेहसूस कर सके। जो राष्ट्र-जन और समस्त जीव, जगत, कल्याण के हित में होगा। यहीं हमारे जीवन की सबसे बडी सार्थकता और सिद्धता हो सकती है। श्रीमानों आप सक्षम है कुछ तो करो।
जय स्वराज
विलेज टाइम्स समाचार सेवा।
कहते है लोकतंत्र की सबसे बडी ताकतवर संस्था कार्यपालिका में संविधान प्रदत्त शक्तियों के चलते आप शासन की शक्ति का अहम भाग है। जिसे सीधे तौर पर संवैधानिक संरक्षण व लोक-जन राज्य, राष्ट्र, नगर, गांव, वार्ड की सेवा कल्याण विकास में विधि सम्वत क्रियान्वयन के अधिकार प्राप्त है। लोकतंत्र में आमजन के वोट के बल 5 वर्ष के लिए सेवा कल्याण को चुने जाने के चलते वोट व सत्ता की खातिर माननीयों की बैवसी मजबूरी तो जान पडती है। मगर श्रीमानों आपको तो विधि सम्वत शासकीय सेवा में आने के बाद 60 वर्ष की उम्र तक सेवा, विकास, कल्याण का बगैर किसी बैवसी लाचारी के संवैधानिक अवसर प्राप्त है। फिर स्वस्थ सोच, सेवा, कल्याण से हम गांव, गली के लोग बैवस, नैसर्गिक सुविधाओं से मेहरूम क्यों है। आखिर आप लोग भी तो हमारे ही बीच से तो है और शासकीय सेवा से निवृत होने के पश्चात आपको भी तो हमारे ही बीच तो रहना है तथा आपके द्वारा सम्र्बधित संरक्षित मार्गदर्शित व्यवस्था में आप और हमको इसी लोकतंत्र में किसी न किसी नगर, शहर, गांव, गली में रहना है।
धन्यवाद के पात्र है हमारे म.प्र के वरिष्ठ मुख्य श्रीमान जिन्होंने मिलावटखोरो पर टूट पडने अपने मातहतों को संदेश दिया है।
श्रीमान सेवा, कल्याण व अनियंत्रित विकास से तो हम 3 दशक से जैसे-तैसे जिन्दा रह इस उम्मीद में जीवन निर्वहन के संघर्षपूर्ण माहौल में संघर्षरत है कि हमारे समृद्ध, खुशहाल जीवन का सपना कभी तो पूर्ण होगा और स्वस्थ सृजनपूर्ण शिक्षा तथा स्वस्थ जीवन के साथ रोजगार न सही तो अपने पुस्तैनी काम धंधे या खेती किसानी का स्वच्छंद मौका मिलेगा। मगर श्रीमानों अब तो हमारी नस्ल ही शुद्ध खादान्न पौष्टिक आहार के आभाव में जीवन के लिए संकटग्रस्त है। दूध, दही, छांछ के देश में असली दूध, दही, मक्खन का संकट है। भाई लोग है कि रातों रात अकूत दौलत कमा स्वर्ग जमीन पर लाना चाहते है और स्वयं के साथ अपनों का भविष्य कई पीढ़ियों तक स्वर्गमयी बनाना चाहते है। ऐसे में उम्मीद सिर्फ और सिर्फ श्रीमानों आपसे से ही है। आप पढे लिखे ऊर्जावान, सामर्थवान और अकल्पनीय पुरूषार्थ के धनी है। मानवीय सेवा कल्याण, विकास की सोच के मामले में आप क्रिमीलियर माने जाते है। क्योंकि माननीय तो वोट और सतत सत्ता नीत के आगे बैवस मजबूर है। बडी उम्मीद है श्रीमानों इस समृद्ध, खुशहाल विरासत के उत्तराधिकारी गांव, गली, गरीब, मायूस, बैवस लोगों को आपसे।
मुझे विश्वास है कि आप हमें निराश नहींे करेंगे। क्योंकि आप हमारे अपने है। हमारे बीच से ही तो आप है। हम एक है। हमारे बीच पद, प्रतिष्ठा, अर्थ, गौरव, वैभव का अन्तर हो सकता है। मगर आखिर हम सभी इन्सान ही तो है और आज इन्सानियत का तकाजा है कि हम और आप मिलकर अवश्य कुछ ऐसा करे जिससे हम ही नहीं हमारी आने वाली पीढ़िया हम पर गर्व और गौरव मेहसूस कर सके। जो राष्ट्र-जन और समस्त जीव, जगत, कल्याण के हित में होगा। यहीं हमारे जीवन की सबसे बडी सार्थकता और सिद्धता हो सकती है। श्रीमानों आप सक्षम है कुछ तो करो।
जय स्वराज
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